Breaking News

बच्चों के किडनी रोग विशेषज्ञों की मध्य भारत में पहली कॉन्फ्रेंस इंदौर में आयोजित हुई

Posted on: 14 Jan 2019 10:58 by Ravindra Singh Rana
बच्चों के किडनी रोग विशेषज्ञों की मध्य भारत में पहली कॉन्फ्रेंस इंदौर में आयोजित हुई
शहर में पहली पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी कॉन्फ्रेंस 13 जनवरी को होटल रेडिसन ब्लू में आयोजित हुई जिसमें देशभर के ख्यात पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट शामिल हुए। यह कॉन्फ्रेंस मध्य भारत में पहली बार  डॉ. शिल्पा सक्सेना द्वारा आयोजित की गई जिसमें उन्होंने इंदौर में पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी में किए जा रहे कार्य पर ऑडियो-विजुअल प्रस्तुत किए एवं इंदौर में उनके द्वारा किए गए किडनी ट्रांसप्लांट के डेटा पर भी प्रेसेंटेशन प्रस्तुत किए। डॉ. शिल्पा सक्सेना एम्स से प्रशिक्षित पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजीस्ट हैं और वर्तमान में वह इंदौर में कंसल्टेंट पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट हैं।
मध्यप्रदेश में पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी की यात्रा के बारे में जानकारी प्रदान करने हेतु एवं इस बारे में शिशु रोग विशेषज्ञों के नॉलेज को अपग्रेड करने के लिए “पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी कॉन्फ्रेंस 2019” का आयोजन किया गया। इस कॉन्फ्रेंस में देश भर के प्रसिद्ध पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजीस्ट मुख्य वक्ताओं के रूप में शामिल हुए। साथ ही मध्य प्रदेश से करीब  150  पीडियाट्रिशियन भी इस कॉन्फ्रेंस में सम्मिलित हुए जिसमें से 50 पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट्स थे।
Pediatric nephrology conference  
इस पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी कॉन्फ्रेंस में लेक्चर्स आयोजित किए गए जिसमें एम्स के पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजीस्ट और विज़ाग, जोधपुर, पुणे,  के अन्य प्रसिद्ध नेफ्रोलॉजिस्ट आदि ने बच्चों में किडनी की बीमारियों के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की। साथ ही किडनी की बीमारियों से पीड़ित बच्चों के लाभ के लिए, विशेषज्ञ किडनी की बीमारियों और उनके प्रभावी उपचारो  के बारे में जानकारी साझा की गई।
साथ ही किडनी ट्रांसप्लांट पर डाटा प्रस्तुत किए गए।
कॉन्फ्रेंस की ऑर्गेनाइज़िंग सेक्रेटरी व पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. शिल्पा सक्सेना ने बताया बच्चों में किडनी की बीमारियों के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। यह बीमारी ज्यादातर जेनेटिक कारणों से होती है। कुछ बेसिक टेस्ट जैसे सिरम क्रिएटिनिन, सोनोग्राफी, बीपी और यूरिन की जांच से बीमारी का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया किडनी रोग से जूझ रहे बच्चों का बीपी ज्यादा रहता है। ऐसे में माता-पिता को बच्चों क बीपी चेक नियमित करवाना चाहिए। भूख नहीं लगना, वजन कम होना, उल्टी, एनिमिया, बोन डिफार्मिटी आदि के लक्षण दिखें तो लापरवाही नहीं करना चाहिए। गर्भावस्था के पांचवें महीने में हर महिला को टारगेट सोनोग्राफी करवाना चाहिए ताकि बच्चे में होने वाले कोई भी विकार का पता समय रहते लगाया जा सके।
Pediatric nephrology conference  
डॉ. शिल्पा सक्सेना ने आगे कहा कि इस कॉन्फ्रेंस के जरिये हमने बच्चों में हो रहे किडनी के रोगों, उनके इलाज और अन्य तकनीकों के बारे में विशेषतौर पर चर्चा की,  जिसका फायदा  प्रैक्टिसिंग    पीडियाट्रिशियन को मिलेगा और वे अपने मरीजों को और बेहतर सुविधाएं तथा इलाज दे पाएंगे।
एम्स, नई दिल्ली में अस्सिटेंट प्रोफ़ेसर एवं पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजीस्ट डॉ. अदिति सिन्हा  ने बताया कि एक्यूट किडनी इंजरी बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने का एक महत्वपूर्ण कारण है। बच्चों में क्रोनिक किडनी की बीमारी बड़ो की तुलना में कम होती है। माता-पिता को अपने बच्चों के स्वास्थ्य के बारे में जागरूक होना चाहिए और अगर बच्चों में वजन कम होना, भूख न लगना, उल्टी, यूरिनरी प्रॉब्लम आदि जैसे लक्षणों अगर दिखे तो तुरंत पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट से संपर्क करें क्योंकि एक्यूट किडनी इंजरी , क्रोनिक किडनी डिसीस, बच्चों में उच्च रक्तचाप, आदि किडनी की बीमारियों को सामान्य लक्षणों से पहचाना नहीं जा सकता है। बुखार,  यूटीआई के लक्षणों में से एक है और बिना सोचे ओवर द काउंटर दवाएं लेने से लिवर और किडनी दोनों पर बुरा असर पड़ता है
उन्होंने आगे कहा, “इंडिया में अब पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट की संख्या पहले से बढ़ गई है।  देश में लगभग 20 – 40 प्रशिक्षित पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट हैं। डॉ. अदिति ने एक्यूट किडनी इंजरी एवं क्रोनिक किडनी डिसीस इन चिल्ड्रन पर प्रेसेंटेशन दिया।  डॉ. अदिति सिन्हा ने बच्चों में एक्यूट किडनी इंजुरी एवं क्रोनिक किडनी डिसीस के बारे में प्रेजेंटेशन दी।”
दिल्ली से आई पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट, डॉ. शोभा शर्मा ने  बताया कि आजकल सेडेंटरी लाइफस्टाइल और खान-पान में बदलाव, ज़्यादा नमक वाली खाने की चीज़ें जैसे चिप्स, जंक फूड, इत्यादि की वजह से बच्चों में ब्लड प्रेशर की समस्या और किडनी के रोग होते है। इसके लिए शुरू से ही बच्चों में सामान्य और ताजा भोजन, रेग्युलर फिजिकल एक्टिविटीज और प्रॉपर लिक्विड इंटेक को लेकर सतर्कता रखनी जरूरी है। जंक फूड कम से कम दें और उसे खूब दौड़ने भागने दें। बच्चों में कब्ज और मोटापा  भी आजकल एक बड़ी समस्या है जो कई बार अनुवांशिक भी हो सकती है। ऐसे में अगर बच्चे को पेट दर्द, उल्टी, या अन्य समस्या की शिकायत बनी रहती है तो पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजीस्ट  से सलाह जरूर लें अपने मन से इलाज करने की बजाय।

Latest News

Copyrights © Ghamasan.com