कवियत्री उज्जवल सिंह का बहुचर्चित कविता संग्रह आज रात, मैं जिन्दा

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रचनाकार: उज्जवल सिंह

प्रकाशक : निकष प्रकाशन

अंग्रेजी साहित्य के सुदृढ राजप्रासाद के सुसज्ज भव्य द्वार पर एक नवोदित भारतीय कवियित्री उज्ज्वल सिंह द्वारा दी गई सशक्त दस्तक है TONIGHT I SURVIVE. अपरिपक्व-वय में परिपक्व गहरे विचारों को अभिव्यक्त करती कुल छब्बीस कविताओं का पुस्तिका रूप में प्रकाशन पढ़ कर पाठक चमत्कृत हुए बिना नही रह पायेगा । यद्यपि मुझे आंग्ल भाषा के साहित्य की समझ व समीक्षा के निकषों का ज्ञान नही है तथापि किसी भी भाषा के साहित्य की समझ व समीक्षा के निकषों का ज्ञान यदि आपको है तो आप हर भाषा के साहित्य की उदात्तता उत्कृष्टता अनुभव करने हेतु पर्याप्त रूप से सक्षम होते हैं,ऐसी मेरी मान्यता है। संग्रह की प्रथम कविता

” Vanity ” विषयक काव्यानुवाद अवलोकनीय है—

हो सकता है
मनुष्य की सहज
धोखा खा जाने वाली दृष्टि में
आप सुन्दर हो !

लेकिन
सौन्दर्य आपको
विलासिता
प्रदत्त नही कर सकता !
क्योंकि अनेक सुन्दर
लोग भी यहां
संघर्ष करते पाये जाते हैं !

और
जो लोग
संघर्ष करते हैं,
वो सच्चा बाह्यान्तर सौन्दर्य
प्राप्त कर
वास्तव में विजयी हो सकते हैं !

कविता विचारात्मक है । प्रकृति-प्रदत्त सौन्दर्य को लोकदृष्टि का भ्रम तथा संघर्ष द्वारा प्राप्त किये गये सच्चे बाह्यानंतर सौन्दर्य को वास्तविक सौन्दर्य निरूपित कर विजयी होने बाबत इंगित करती है । इस तरह सौन्दर्य को संघर्ष से जोड़कर सम्पूर्ण बाह्य और अंतर को सच्चे वास्तविक सौन्दर्य के रूप में स्थापित करना नवांकुर कवियित्री की जीवन के सन्दर्भ से मौलिक दृष्टि और सोच को दर्शाता है । कवियित्री एक सचेत प्रबुद्ध नारी मन-मस्तिष्क के चैतन्य विचारों को इस संग्रह की अपनी प्रत्येक कविता के माध्यम से पाठक को अवगत करवाती चलती है ।

उपरान्त की प्रत्येक कविता नारी मन व उसकी समस्याओं को अपनी संवेदनशील अनुभूतियों में मथकर उन पर अपना गम्भीर नवल उज्ज्वल वैचारिक दृष्टिकोण सहज अभिव्यक्त करती आभासित होती है,और पाठक की सोच को देर तक झकझोरती हुई विचार करने को विवश करती है और इस प्रक्रिया से पाठक मन को स्पर्श कर लेती है ।

संग्रह की Cry कविता पाठक के मन में करुणा का उद्रेक उत्पन्न करने में भलीभांति सफल है । सर्वशक्तिमान से कवियित्री के वार्तालाप और प्रश्न तथा मेंटर श्रीमती सारिका मूंदड़ा द्वारा समाधान के यत्न भी बख़ूबी कविताओं की सुन्दरता में वृद्धि करते लगते हैं और भी संक्षेप में कहें तो यह षोडश वर्षीय कवियित्री उज्ज्वल सिंह का भविष्य TONIGHT I SURVIVE कविता-संग्रह की कविताओं का परिशीलन करने पर निर्मल उज्ज्वल प्रतीत होता है ।

ये कविताएं बौद्धिक पाठक को वैचारिक आनन्द प्रदान करने में सर्वथा समर्थ व संग्रहनीय है । यद्यपि कवियित्री को अभी समय के साथ, सतत परिश्रम कर व साधनारत रह अपनी कविताओ के पाठको को चमत्कृत कर देने वाला शिल्प गढ़ना शेष है । अनन्त हार्दिक शुभकामनाये । पुस्तक रुपये 61/- flipkart को मूल्य अदा कर क्रय की जा सकती है ।

पुस्तक रुपये 61/- flipkart को मूल्य अदा कर क्रय की जा सकती है ।

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