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न्यायाधिपति श्री सुजय पॉल ने संविधान को लेकर कह दी ये बड़ी बात, संविधान अच्छा या खराब नहीं हैं……….

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर के न्यायाधिपति एवं मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी जबलपुर के चेयरमेन श्री सुजय पॉल के मुख्य आतिथ्य एवं प्रशासनिक न्यायाधिपति मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ इन्दौर श्री विवेक रूसिया के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति इन्दौर में उच्च न्यायालय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (निःशुल्क और सक्षम विधिक सेवा) विनियम 2010 के अन्तर्गत 23 एवं 24 दिसम्बर को दो दिवसीय पैनल अधिवक्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। प्रथम दिवस गुरूवार को मुख्य अतिथि न्यायाधिपति श्री सुजय पॉल द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया ।

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उद्घाटन सत्र में न्यायाधिपति श्री पॉल द्वारा भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर को उद्धृत करते हुए बताया कि “संविधान चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि वे लोग, जिन्हें संविधान को अमल में लाने का काम सौंपा जाये, खराब निकले तो निश्चित रूप से संविधान खराब सिद्ध होगा। दूसरी ओर, संविधान चाहे कितना भी खराब क्यों न हो, यदि ये लोग, जिन्हें संविधान को अमल में लाने का काम सौंपा जाये, अच्छे हों तो संविधान अच्छा सिद्ध होगा ।” इसी प्रकार समाज के कमजोर वर्गों की पूर्ण निष्ठा के साथ सहायता करने का दायित्व हम सब का है ।

अधिवक्ताओं के कार्य व्यवहार एवं आचरण विषय पर संबोधित करते हुए न्यायाधिपति श्री पॉल द्वारा बताया गया कि ऐसे बंदियों के विधिक अधिकारों की रक्षा करना विधिक सेवा प्राधिकरण के पैनल अधिवक्ताओं का कर्तव्य है जो संसाधन एवं धन के अभाव में वर्षों से जेलों में निरुद्ध हैं । ऐसे प्रकरणों में नियुक्त किये गये पैनल अधिवक्ताओं की महती जिम्मेदारी है कि वह पूर्ण निष्ठा एवं कर्मठता से उन प्रकरणों की पैरवी करें।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में सेवानिवृत्त न्यायाधिपति मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ इन्दौर श्री एस. के. अवस्थी द्वारा बेल की अवधारण, बेल के निरस्त होने एवं क्रिमिनल अपील एवं रिवीजन की समय-सीमा/क्षमा के संबंध में प्रतिभागियों का ज्ञानवर्धन किया गया।

कार्यक्रम के तीसरे सत्र में सेवानिवृत्त न्यायाधिपति मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ इन्दौर श्री सी. व्ही. सिरपुरकर द्वारा क्रिमिनल रिवीजन की अवधारण एवं दायरा के संबंध में प्रतिभागियों का ज्ञानवर्धन किया गया।
कार्यक्रम के चौथे सत्र में सेवानिवृत्त प्रिसिंपल रजिस्ट्रार एवं सचिव मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति इन्दौर डॉ. मोहम्मद शमीम द्वारा क्रिमिनल अपील की अवधारण जिसमें अपील के प्रकार, अपीलेट कोर्ट की शक्तियाँ एवं किन प्रकरणों में अपील का उपशमन हो सकता है के संबंध में प्रतिभागियों का ज्ञानवर्धन किया गया ।
कार्यक्रम के पाँचवें सत्र में सेवानिवृत्त न्यायाधिपति मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ इन्दौर श्री शैलेन्द्र शुक्ला द्वारा दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 161, धारा 162, धारा 164, धारा 311 धारा 319 एवं दण्ड प्रक्रिया संहिता के अध्याय-35 (धारा 460 से धारा 466 तक ) अनियमित कार्यवाही की अवधारणा के संबंध में प्रतिभागियों का ज्ञानवर्धन किया गया ।

कार्यक्रम में प्रिंसिपल रजिस्ट्रार एवं सचिव मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति इन्दौर श्री बी. के. द्विवेदी, ओ.एस.डी. एवं रजिस्ट्रार श्री नवीन पाराशर, एडिशनल एडवोकेट जनरल श्री पुष्यमित्र भार्गव, असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल श्री हिमांशु जोशी, अध्यक्ष उच्च न्यायालय अभिभाषक संघ इन्दौर श्री सूरज शर्मा, रजिस्ट्रार (एम.) श्री ए. व्ही. मण्डलोई, जिला विधिक सहायता श्री मनीष कौशिक के साथ-साथ विधिक सहायता पैनल के लगभग 75 अधिवक्तागण सम्मिलित हुए।

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