इंदौर। भारत सरकार की पहल पर UNO ने आगामी वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष घोषित किया है। प्रधानमंत्री के आह्वान पर भारत सरकार मिलेट का उपयोग बढ़ाने के लिये सभी राज्यों में किसानों को मिलेट की खेती करने और उपभोक्ताओं को मिलेट का उपयोग कर इम्युनिटी बढ़ाने के लिये प्रोत्साहित कर रही है। विश्व में भारत मिलेट का प्रमुख उत्पादक देश है और यहाँ से सभी प्रकार के मिलेट का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है।

ये कहना है साबु ट्रेड सेलम के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री गोपाल साबु का, जो कुकरीजॅाकी ब्रांड के अंतर्गत बाज़ार में भगर, कोदरा, झंगोरा, कंगनी और रागी जैसे पांच गुणकारी मिलेट्स को घर घर तक पहुंचाने का संकल्प लिए हुए हैं। साबु ने बताया कि दो दिन के अंतराल से बदल बदल कर लगातार मिलेट्स का उपयोग करने पर सिर्फ पन्द्रह दिन में ही उन्होंने अपने बरसों पुराने डायबिटीज में आश्चर्यजनक सुधार पाया।

मिलेट्स पर गोपाल साबु और उनकी टीम ने मध्य और उत्तर भारत में मिलेट्स की जागरूकता बढाने के लिए काफी काम किया है जिसमें गत नवरात्रि में हिन्दी में एक लघु पुस्तिका प्रकाशित कर इन्दौर में विभिन्न जगहों पर मिलेट्स से बनी स्वादिष्ट फरियाली खिचड़ी के साथ वितरित की थी । उन्होंने बताया कि मिलेट उपयोग की विशेषताओं की जानकारी बढ़ाने हेतु यह पुस्तिका वेब पर भी https://sabuindia.in/Sabu-About-Millet-Handbook-Hindi.pdf  लिंक पर नि:शुल्क उपलब्ध है।

इसी प्रकार गुणकारी मिलेट से विभिन्न प्रकार के पकवान बनाने के तरीकों की विधियां हिन्दी में वीडियो बनवा कर साबु ट्रेड ने यू-ट्यूब पर प्रसारित की है जिन्हें https://www.youtube.com/c/SABUTRADE पर देखा जा सकता है।

मिलेट्स के भावों के बारे में साबु ने बताया कि इस वर्ष सामान्य से अधिक वर्षा होने से मिलेट की फसलों को भी काफी क्षति पहुँची है, दूसरी तरफ प्रत्येक दिशावरों में मांग बढ़ने से और तैयार माल की कमी के कारण मिलेट्स के दामों में अच्छी तेजी की सम्भावना बन रही है ।

साबुदाना की बिक्री मंद होने से भावों में सुस्ती का रूख

साबुदाने के बाज़ार के रुख के बारे में साबु ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की तरह ठंड आरम्भ होने से साबुदाना की खपत कम हुई है। सेलम, तमिलनाडु में कसावा कंद (जिससे साबुदाना बनता है) की नई फसल आना शुरू हो गयी है जो आसपास के खेतों से जनवरी-फरवरी माह तक उत्पादकों के पास आती रहेगी। सेलम में अभी तेज धूप न होने से नया साबुदाना पूरी तरह सूखा नहीं आ रहा है, जिससे स्टॉक करने पर क्वालिटी हल्की होने और रंग बदलने का खतरा रहता है अत: स्टॉक करने वाले एकदम सूखा माल आने का इतजार कर रहे हैं।

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दिसम्बर के दूसरे पखवाड़े से तेज धूप के बाद स्टॉक करने लायक साबूदाना आने की उम्मीद है। जमीकंद कसावा की फसल नौ महीने में आती है। इस वर्ष उत्पादकों के पास पुराने स्टॉक के रखे रहने से पिछले तीन – चार महीनों में भाव काफी कम हो गये और अब ज्यादा घटने की उम्मीद न के बराबर है। तमिलनाडु में इस बार सामान्य से अधिक बारिश होने के कारण कई इलाकों में कंद की फसल को काफी नुकसान होने की भी खबर है। साबुदाना बाजार में यदि कृत्रिम तेज़ी – मंदी करने वालों का दखल नहीं रहा तो 2023 में सीजन खत्म होने के पूर्व ही सामान्य रूप से साबुदाना – स्टार्च के भावों में अच्छी बढ़त का अनुमान है। व्यापारी अपने साबुदाना के हाजिर स्टॉक में कटौती न कर के साबुदाना लगातार लेते – बेचते रहें तो उन्हें आने वाली तेजी का पूरा लाभ मिल सकेगा।