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15 अगस्त को इंदौर हाईकोर्ट में लगेगी दुर्लभ समाचार पत्रों की प्रदर्शनी, आम जनता के लिए ये होगा समय

भारत ब्रिटिश हुकूमत की 200 वर्ष की गुलामी की जंजीरों से मुक्त होकर स्वतंत्र राष्ट्र बना था। तब ना तो कोई टी.वी. चैनल थे, ना इंटरनेट ना ट्विटर। उस वक्त खबरों के प्रसार के माध्यम से केवल रेडियो एवं समाचार पत्र ही थे।

इंदौर,जस्टिसअनिल वर्मा। भारत के स्वाधीनता संघर्ष में समाचार पत्रों की अहम भूमिका रही है। इतिहास के पन्ने गवाह है कि 15 अगस्त 1947 को आधी रात 0.07 बजे से 00.27 के बीच भारत ब्रिटिश हुकूमत की 200 वर्ष की गुलामी की जंजीरों से मुक्त होकर स्वतंत्र राष्ट्र बना था। तब ना तो कोई टी.वी. चैनल थे, ना इंटरनेट ना ट्विटर। उस वक्त खबरों के प्रसार के माध्यम से केवल रेडियो एवं समाचार पत्र ही थे। ऐसे ऐतिहासिक और दुर्लभ समाचार पत्रों की प्रदर्शनी 15 अगस्त को इंदौर हाईकोर्ट के मुख्य भवन में आयोजित की गई है।

15 अगस्त 1947 की सुबह जब समाचार पत्र आये, तो देश की आजादी की खबर पढ़कर समूचा देश खुशी से झूम उठा था। भारत के युग परिवर्तन की इस सुनहरी दास्तान को ना केवल भारत के वरन समूची दुनिया के समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। स्वाधीनता के 75 वें अमृत महोत्सव के विशिष्ट अवसर पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के जस्टिस अनिल वर्मा ने 15 अगस्त 1947 के ऐतिहासिक समाचार पत्रों की एक दुर्लभ प्रदर्शनी तैयार की है, इसमें भारत के तत्समय प्रकाशित हिन्दी, अंग्रेजी, क्षेत्रीय भाषाओं के समाचारपत्रों के अलावा इंग्लैण्ड, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, आयरलैंड, पाकिस्तान आदि में प्रकाशित भारत की स्वाधीनता के बारे में प्रकाशित समाचार पत्रों का ऐतहासिक संकलन फोटो रूप में है। इनके अवलोकन से स्वाधीनता दिवस के हर्षोल्लास की उन अमिट स्मृतियों का सहज पुनरावलोकन किया जा सकता है।

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यह उल्लेखनीय है कि जस्टिस अनिल वर्मा के बाबा स्व. मोतीलाल वर्मा भी स्वाधीनता संग्राम सेनानी रहें है, उन्होंने अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के साथ काम किया और फिर डॉ. राजेन्द्र प्रसाद व महात्मा गाँधी के साथ काम करते हुए जंगल सत्याग्रह (1931) एवं भारत छोड़ो आंदोलन (1942) में 6-6 माह कठोर कारावास की सजाऐं भोगी थी। यह दुर्लभ प्रदर्शनी मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय इन्दौर के मुख्य भवन में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त 2022 को दोपहर 12 बजे से शाम 7 बजे तक आम जनता के अवलोकन हेतु खुली रहेगी।

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