मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी जनवरी में गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘यह पहली बार है जब अरब गणराज्य मिस्र के राष्ट्रपति हमारे गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि होंगे।’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अल-सीसी को औपचारिक निमंत्रण भेजा था जो विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 16 अक्टूबर को मिस्र के राष्ट्रपति का सौंपा था। मिस्र के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी का न्योता स्वीकार कर लिया है।

बता दें दोनों देश इस साल राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। ऐसे में मिस्र को 2022-23 में G-20 की भारत की अध्यक्षता के दौरान अतिथि देश के रूप में भी आमंत्रित किया गया है। भारत और मिस्र के सभ्यतागत तथा लोगों से लोगों के बीच गहरे संबंधों पर आधारित मैत्रीपूर्ण संबंध हैं।

गौरतलब है कि भारत में गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में विदेशी प्रतिनिधि को बुलाने की परंपरा रही है। 26 जनवरी, 1950 को लाल किले पर आयोजित किए गए पहले गणतंत्र दिवस समारोह में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। वहीं 1955 में पहली बार राजपथ पर आयोजित हुए समारोह में पाकिस्तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मुहम्मद को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था।

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गणतंत्र दिवस के इतिहास में साल 1952, 1953 और 1966 में किसी भी विदेशी प्रतिनिधि को आमंत्रित नहीं किया गया था। आखिरी बार 1966 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के निधन के कारण किसी विदेशी प्रतिनिधि को निमंत्रण नहीं दिया गया था। इसी तरह 2021 में ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को आमंत्रित किया गया था, लेकिन कोरोना के नए स्ट्रेन के कारण उन्होंने अपना दौरा निरस्त कर दिया था।