Breaking News

गोवर्धन पूजा आज जानिये पूजन विधि और कथा

Posted on: 20 Oct 2017 06:37 by Ghamasan India
गोवर्धन पूजा आज जानिये पूजन विधि और कथा

नई दिल्ली ।  कल दिवाली का त्यौहार देशभर में धूमधाम से मनाया गया दिवाली के दुसरे दिन गोवर्धन की पूजा कि जाती है गोवर्धन की पूजा पीछे कई कारण बताये जाते है. इसे प्रकृति से भी जोड़ कर देखा जाता है.

महत्व
इस पूजा में गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है. इसे अन्नकूट भी कहा जाता है. जिसके पीछे काफी प्रचलित पौराणिक कथा है. गोवर्धन पूजा में गौ माता की पूजा का भी प्रावधान है. माना जाता है कि जिस प्रकार मां लक्ष्मी धन से कल्याण करती है उसी प्रकार गौ माता अपने दूध से मानव शरीर का कल्याण करती है.

गोववर्द्धन पूजा कथा
इस पूजा के पीछे एक प्रचलित कथा है एक बार की बात है इंद्र को अपनी शक्तियों पर घमंड हो गया। तब भगवान कृष्ण ने उनके घमंड को चूर करने के लिए एक लीला रची। इसमें उन्होंने सभी ब्रजवासियों और अपनी माता को एक पूजा की तैयारी करते हुए देखा तो, यशोदा मां से पूछने लगे, “मईया आप सब किसकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं?” तब माता ने उन्हें बताया कि ‘वह इन्द्रदेव की पूजा की तैयारी कर रही हैं।” फिर भगवान कृष्ण ने पूछा “मैइया हम सब इंद्र की पूजा क्यों करते है? तब मईया ने बताया कि ‘इंद्र वर्षा करते हैं और उसी से हमें अन्न और हमारी गाय के घास मिलता है। यह सुनकर कृष्ण जी ने तुरंत कहा “मैइया हमारी गाय तो अन्न गोवर्धन पर्वत पर चरती है, तो हमारे लिए वही पूजनीय होना चाहिए। इंद्र देव तो घमंडी हैं वह कभी दर्शन नहीं देते हैं।

कृष्ण की बात मानते हुए सभी ब्रजवासियों ने इन्द्रदेव के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इस पर क्रोधित होकर भगवान इंद्र ने मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। वर्षा को बाढ़ का रूप लेते देख सभी ब्रज के निवासी भगवान कृष्ण को कोसने लगें। तब कृष्ण जी ने वर्षा से लोगों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कानी उंगली पर उठा लिया। इसके बाद सब को अपने गाय सहित पर्वत के नीचे शरण लेने को कहा। इससे इंद्र देव और अधिक क्रोधित हो गए तथा वर्षा की गति और तेज कर दी। इन्द्र का अभिमान चूर करने के लिए तब श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से कहा कि आप पर्वत के ऊपर रहकर वर्षा की गति को नियंत्रित करने को और शेषनाग से मेंड़ बनाकर पर्वत की ओर पानी आने से रोकने को कहा।

Latest News

Copyrights © Ghamasan.com