भोपाल में आखिर दिग्विजय सिंह का मुकाबला कौन करेगा |Who will fight against Digvijay Singh in Bhopal

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digvijay singh

जिस दिन कमलनाथ ने दिग्विजयसिंह को भोपाल से लोकसभा प्रत्याशी घोषित किया था, राजनीतिक क्षेत्रों में इसे राधौगढ़ के राजा को चक्रव्यूह में फांसकर उनका राजनीतिक पटाक्षेप करने की साजिश बताते हुए चर्चाएं चल पड़ी। कई टिप्पणियों में यह अनुमान लगाया गया कि अब आया है ऊंट पहाड़ के नीचे।

राजगढ़ संसदीय क्षेत्र से तो उनको फिलहाल कोई बड़ी चुनौती थी नहीं, माना गया कि कमलनाथ ने यह कहकर राजा को फंसा दिया कि उनके जैसे बड़े नेता उन कठिन सीटों से लड़ें जहां पार्टी 30 सालों से हार का मुँह देख रही है। लिहाजा उन्हें भोपाल से उतारने का ऐलान किया गया जहां 1989 से कमल लहरा रहा है।

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इस घोषणा के बाद से भगवा खेमे से दिग्गी राजा को घेरने की कई सुरसुरी छोड़ी गई। मसलन, आतंकवाद के आरोपों में जेल में बंद रही साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को भाजपा भोपाल से चुनाव लड़ाएगी जिससे कि हिन्दू मुस्लिम ध्रुवीकरण सुलगाया जा सके और साम्प्रदायिक माहौल के ताप में दूर दूर तक रोटियां सेंकी जा सके। लेकिन सुना, यह सुरसुरी किसी बड़े नेता के रुची न लेने के कारण परवान चढ़ नहीं पा रही।

फिर चर्चा चली की नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर छोड़ना चाहते हैं तो उन्हें भोपाल से चुनाव लड़ाया जाएगा। लेकिन सुना है कि वो खुद मुरैना से मैदान में उतरना चाहते हैं जो उनके लिए ज्यादा सुरक्षित सीट है।

अब जब यह बात फैल गई कि भाजपा दिग्विजयसिंह के खिलाफ कोई दमदार प्रत्याशी तय ही नहीं कर पा रही है, और दूसरी ओर राजा ने जमकर तैयारी शुरू भी कर दी है, भाजपा खेमे में खलबली है। मनोबल बढ़ाने के लिए शिवराज सिंह चौहान को भोपाल से उतारने की कवायद चल रही है।

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मुझे लगता है भाजपा इस बार भोपाल सीट हार जाएगी क्योंकि किसी बड़े नेता के न लड़ने और फिर मौजूदा सांसद आलोक संजर, महापौर आलोक शर्मा या विष्णुदत्त शर्मा के बारे में यह माना जा रहा है कि इनमें से किसी का भी कद दिग्विजयसिंह को टक्कर दे पाने जैसा नहीं है ।

काँग्रेस सत्ता में है और उनके पुत्र केबिनेट मंत्री जयवर्धन सिंह सहित आठ मंत्री और सुरेश पचौरी सहित कई बड़े नेताओं ने कमान संभाल ली है। नर्मदा परिक्रमा के बाद से आत्मविश्वास से भरपूर दिग्विजयसिंह का पलड़ा भारी है।

वरिष्ठ पत्रकार संजीव आचार्य

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