सुख-शांति पाना है तो नरक चतुर्दशी की शाम को लगाइए ‘यमदीप’

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कार्तिक कृष्ण चतुदर्शी को यानी दीपावली के एक दिन पहले यम चतुर्दशी या रूप चतुर्दशी मनायी जाती है। इस दिन श्री कृष्‍ण ने नरकासुर दैत्‍य का संहार कर लोगों को अत्‍याचार से मुक्ति दिलाई थी।

Image result for नरक चतुर्दशी का त्योहार हर साल कार्तिक कृष्ण चतुदर्शी को यानी दीपावली के एक दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन श्री कृष्‍ण ने नरकासुर दैत्‍य का संहार कर लोगों को अत्‍याचार से मुक्ति दिलाई थी। इसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है। इसके अलावा इसे यम चतुर्दशी और रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। क्या है मान्यता? मान्‍यता है कि इस दिन घर में पित्तरों का आगमन होता है। शाम को वापस जाते वक्‍त दक्षिण दिशा में तेल का दिया रखकर उनके रास्‍ते को रोशन किया जाता है, इसलिए इस दिए को यमदीप भी कहते हैं। इससे अकाल मृत्‍यु का भय भी खत्‍म होता है। इस दिन यमराज की पूजा और उनके लिए व्रत करने का विधान भी है।
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नरक चतुर्दशी के पूर्व आपको अपने घर की साफ-सफाई अच्छेसे करनी चाहिए। खंडित वस्तुओं और पुराने सामान को नरक का प्रतिक माना जाता है इसलिए साफ सफाई में ऐसी सभी खराब पड़ी वस्तुओं को घर से बाहर निकल देना चाहिए।

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पौराणिक मान्‍यता के अनुसार इस दिन घर में पित्तरों का आगमन होता है और शाम को वापस पितृलोक चले जाते है। इसलिए उनके जाते वक्‍त दक्षिण दिशा में तेल का दिया रखकर उनके रास्‍ते को रोशन किया जाता है, इसलिए इस दिए को यमदीप भी कहते हैं। इससे अकाल मृत्‍यु का भय भी खत्‍म होता है। इस दिन यमराज की पूजा और उनके लिए व्रत करने का विधान भी है।

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नरक चतुर्दशी के दिन घर की सफाई के साथ हीं अपने स्वास्थ्य और सौंदर्य का भी ध्यान रखना चाहिए। शरीर की सफाई पर भी ध्यान देना चाहिए और अपने रूप तथा सौन्दर्य को बनाए रखने के लिए सूर्योदय के पूर्व तिल के तेल से मालिश करके शरीर पर उबटन लगा कर स्नान करना चाहिए। नहाने के बाद तैयार होकर,दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यम-तर्पण करना चाहिए । इससे वर्ष भर के पाप नष्ट हो जाते हैं।

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इसके बाद शाम को दक्षिण दिशा की ओर मुख करके चौमुखी दीप जलाना चाहिए। इस रात को तिल के तेल के 14 दीपक जलाने की परम्परा है।

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