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सावन में करें शिवजी को प्रसन्न, ऐसे करें पूजा बरसेगा धन

Posted on: 14 Jul 2019 12:11 by Ayushi Jain
सावन में करें शिवजी को प्रसन्न, ऐसे करें पूजा बरसेगा धन

हिन्दू धर्म में सावन महीने का खास महत्व है। इस साल सावन 17 जुलाई से शुरू हो रहा है और सावन का आखिरी दिन 15 अगस्त को है। इसमें खास तौर पर भगवान शंकर की पूजा की जाती है। इस महीने में सोमवार के व्रत का खास महत्तव है। माना जाता है इससे जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है। शास्त्रों के अनुसार भगवन शिव को त्रिदेव कहा जाता हैं। साल में दो शिवरात्रियां मनाई जाती है।

पहली फाल्गुन के महीने में और वहीं दूसरी शिवरात्रि सावन के महीने में मनाई जाती है। कहा जाता हैं कि सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। शिवरात्रि में शिवलिंग पर जलाभिषेक करना आवश्यक माना गया है। इससे भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं। शिवरात्रि में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं।

इस महीने रुद्राभिषेक करने से भक्तों के समस्त पापों का नाश हो जाता है। इस साल सावन के महीने में 4 सोमवार हैं। इन तिथियों में भगवान शंकर की पूजा-अर्चना करना धार्मिक दृष्टि से बहुत फलदायी माना गया है। शास्त्रों में भी सोमवार को भगवान शिव की पूजा-आराधना के लिए विशेष विधियों की व्याख्या की गई है।

पूजा विधि –
सावन के दिन भोलेनाथ को बेलपत्र, धतूरा, भांग, शहद आदि अर्पित कर विशेष पूजन करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इससे परिवार की स्वास्थ्य समस्याएं दूर होती हैं। सुबह जल्दी उठकर नहा-धोकर भगवान शिवजी का पूजन बेलपत्र, धतूरा, भांग, शहद, विशेष फूल से करें। इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। शिवपुराण के अनुसार बेलपत्र भगवान शिव को बहुत प्रिय है। बेलपत्र की तासीर ठंडी होती है इसलिए इसका प्रयोग भगवान शिव की पूजा में किया जाता है। पूजा में बेलपत्र इस्तेमाल करने से सरे पाप कट जाते है।

इन पुष्प को चढ़ाने से होगी सभी मनोकामनाएं पूर्ण –

1- धतूरे के पुष्‍प शिव को अर्पित करने से पुत्र की प्राप्ति होती है।
2- अकौड़े के फूल शिव को अर्पण करने से दीर्घ आयु की प्राप्ति होती है।
3- एक लाख बिल्‍वपत्र अर्पित करने से हर इच्छित वस्‍तु की प्राप्ति होती है।
4- जवाकुसुम से शत्रु का नाश होता है।
5- बेला से सुंदर सुयोग्‍य पत्‍नी की प्राप्ति होती है।
6- हरसिंगार से सुख संपत्ति की प्राप्ति होती है।
7- दुपाहरिया के पुष्‍प से आभूषणों की प्राप्ति होती है।
8- आक, अलसी और शमी पत्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
9- शंखपुष्‍प से लक्ष्‍मी की प्राप्ति होती है।
10- तुलसी, चंपा और केवड़ा के पुष्‍प शिव पूजन में निषिद्ध हैं।

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