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5 राज्यों में चुनावी हो हल्ला…

देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीति दलों ने अपनी तैयारियों को मूर्तमान करने का सिलसिला शुरू कर दिया है।

भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती पीएम की लोकप्रियता को साबित करने की

देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीति दलों ने अपनी तैयारियों को मूर्तमान करने का सिलसिला शुरू कर दिया है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि पांच में से चार राज्यों में भाजपा के लिए चुनौती होगी वहीं सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विशेषकर पंजाब राज्य में भाजपा को न केवल पार्टी की जड़ को ओर अधिक मजबूत करना होगा, वहीं पीएम मोदी की लोकप्रियता भी साबित करना होगी।

राजनीति आरोप प्रत्यारोप के बीच ऐलान

पंजाब में पीएम मोदी की सुरक्षा की चूक के मामले की गूंज अभी भी थमी नहीं है। राजनीतिक तौर पर आरोप प्रत्यारोप लगाए जा रहे है और ऐसी ही स्थिति में चुनाव आयोग ने चुनाव का ऐलान कर दिया। आचार संहिता लग गई है इसलिए आचार संहिता का पालन हर किसी राजनेता को करना होगा, लिहाजा मतदाताओं के पास जाकर ही अपने दिल की बात करना राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

अकाली दल ने भाजपा का साथ छोड़ दिया है

2017 में भाजपा अकाली दल के साथ मिलकर चुनाव लड़ी थी , जिसमें अकाली दल को 15 और भाजपा को 3 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। पिछले चुनाव में राज्य की कुल 117 सीटों में से 77 सीटों पर जीत हासिल कर कांग्रेस ने प्रदेश में सरकार बनाई थी और अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री बने थे। इस बार अकाली दल ने भाजपा का साथ छोड़ दिया है और 2017 में कांग्रेस को जीत दिलाने वाले अमरिंदर सिंह नई पार्टी बनाकर भाजपा के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रहे हैं।

पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का मुद्दा

अकाली दल के साथ अब तक छोटे भाई की भूमिका में चुनाव लड़ने वाली भाजपा पहली बार राज्य में बड़े भाई की भूमिका में अमरिंदर सिंह और अकाली दल के पूर्व नेता सुखदेव सिंह ढ़ींढसा के साथ मिलकर विधान सभा चुनाव लड़ने जा रही है । 2017 में राज्य की केवल 23 सीटों पर चुनाव लड़कर 5.39 प्रतिशत मतों के साथ केवल 3 सीटों पर जीत हासिल करने वाली भाजपा इस बार 75 सीटों के आसपास लड़ने की तैयारी कर रही है। पीएम की सुरक्षा में चूक के मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री और अन्य कांग्रेसी नेताओं द्वारा लगातार दिए जा रहे बयानों को देखते हुए राज्य में जीत हासिल करना अब पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का मुद्दा बन गया है।

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