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बटेश्वर के मंदिर आपका मन मोह लेंगे

Posted on: 14 Dec 2018 16:55 by Ravindra Singh Rana
बटेश्वर के मंदिर आपका मन मोह लेंगे

लेखक मुकेश नेमा की कलम से

बटेसर का नाम सुना है आपने ! ना सुना हो तो इसमे अचरज जैसा कुछ नही ! ग्वालियर मे पीढि़यो से बसे बहुतो ने ही नही सुना होगा ! सुना होगा तो अनसुना कर दिया होगा ! बटेसर मे आखिर ऐसा है क्या ! बटेसर है देवताओ की बस्ती ! सारे देवी ,देवता ,ऋषि- मुनि सभी बसे यहाँ ! आज से करीब चौदह सौ साल पहले यहाँ राज कर रहे गुर्जर प्रतिहार वंश के राजाओ ने यहाँ एक ही परिसर मे दौ सौ से ज्यादा मंदिर बनवाये ! ये कितनी पुरानी बात है ,इसे इससे समझिये कि ये मंदिर खजुराहो से तीन सौ साल पहले बने !

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कैसा रहा होगा वो समय ! कितने समय मे बने होगें ये दर्शनीय मंदिर ! तब के गुणग्राहक राजाओ ने कहाँ कहाँ से ऐसे गुणी कारीगर जुटाये होगें जो इस दुर्गम स्थान पर ऐसा स्वर्ग रच सकें ! पर प्रकृति तो अपना काम करती ही है ! कहते है करीब हजार साल पहले धरती हिली और ये बेजोड मंदिर धराशायी हुये ! इन्हे बनवाने वाले राजा भी तब तक इतिहास की किताबो मे समा चुके थे सो किसी ने ध्यान दिया नही इन मंदिरो पर ! धीरे धीरे मंदिरो का यह मलवा धरती मे दबता चला गया ! इस उजाड बियाबान इलाके मे डाकूओ के डेरे लगे ! ऐसे मे लोगो ने इस तरफ मुँह करना ही छोड दिया ! सैकडो सालो तक किसी को बटेसर और यहाँ के मंदिरो का कुछ अता पता ही नही रहा ! ये मंदिर हमारी स्मृति से विदा हो गये !

पर सन दो हजार पाँच मे भगवानो को अपनी यह बस्ती फिर याद आयी ! यह वो वक्त था जब इस इलाके में मशहूर डकैत निर्भयसिंह गूजर का दबदबा था ! यहाँ पहुँचे के के मोहम्मद साहब ! भारतीय पुरातत्व विभाग के इस जीनियस और धुन के पक्के अधिकारी ने इतिहास की यह जर्जर पांडुलिपि फिर पलटी ! और तमाम दिक्कतो के बावजूद यहाँ बिखरे लावारिस पत्थरो से करीब पच्चानवे खूबसूरत मंदिर फिर खडे कर दिये ! फिर शायद मोहम्मद साहब ट्राँसफर हुये या रिटायर हुये ,या बजट का टोटा हुआ ! यहाँ का काम रूक गया पर और लोग कहते है अभी भी यहाँ की जमीन मे सौ से ज्यादा मंदिर दबे पडे है और उन्हे भी किसी मोहम्मद का इंतजार है !

इन मंदिरो तक होकर जाने वाला सँकरा रास्ता देहातो के बीच से होकर गुजरता है ! अब भी गिने चुने लोग ही देखने पहुँचते है इन्हे ! अब भी यहाँ जरूरी प्राथमिक सुविधाओ का अकाल है ! और ये इसलिये है कि इन मंदिरो की हैसियत ,महत्व को उजागर करने की ,इनके बारे मे दुनिया को बताने की जिम्मेदारी जिनकी है वे भी शायद इन्हे कायदे से आँक नही पाये हैं !
इन सभी दिक्कतो के बावजूद ,ग्वालियर से करीब तीस किलोमीटर दूर बने ये मंदिर देखने लायक है और जरूर देखे जाने चाहिये !
देख चुकें हो शायद आप बटेसर के ये मंदिर ! ना देखे हो तो अब देख आईये !

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