MP News : Thalassemia के मरीज, 2 वर्षीय कैरव को मैचिंग ब्लड स्टेम सेल डोनर की जरूरत है

शिवपुरी, मध्यप्रदेश के 2 वर्षीय कैरव को थैलेसेमिया मेज़र है और वो इस समय नियमित तौर से ब्लड ट्रांसफ्यूज़न करा रहे हैं। थैलेसेमिया खून की एक अनुवांशिक विकृति है, जिसमें खून में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम रहता है।

MP News : शिवपुरी, मध्यप्रदेश के 2 वर्षीय कैरव को थैलेसेमिया मेज़र(Thalassemia Major) है और वो इस समय नियमित तौर से ब्लड ट्रांसफ्यूज़न(Blood Transfusion) करा रहे हैं। थैलेसेमिया खून की एक अनुवांशिक विकृति है, जिसमें खून में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम रहता है। उनका इलाज राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली में हो रहा है और उनके डॉक्टरों ने उन्हें स्वस्थ करने का एकमात्र रास्ता मैचिंग डोनर से ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट बताया है।

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डीकेएमएस बीएमएसटी फाउंडेशन इंडिया एक गैरलाभकारी संगठन है, जो ब्लड कैंसर एवं खून की विकृतियों से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। यह फाउंडेशन कैरव के लिए मैचिंग डोनर तलाश रहा है। भारत के नागरिकों से संपर्क करने के लिए डीकेएमएस-बीएमएसटी ने एक वर्चुअल अभियान छेड़ा है, जिसमें व्यक्ति ऑनलाईन रजिस्टर कराके कैरव जैसे मरीजों के लिए जीवनरक्षक बन सकता है।

पंजीकरण कराने के लिए लिंक है : www.dkms-bmst.org/Kayrav

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उनका इलाज करने वाले फिज़िशियन, डॉ. दिनेश भूरानी, डायरेक्टर, डिपार्टमेंट ऑफ हेमेटो-ऑन्कोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन, राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर, नई दिल्ली ने कहा, ‘‘भारत में हर 5 मिनट में किसी न किसी को ब्लड कैंसर या थैलेसेमिया जैसी खून की विकृति पाई जाती है। कैरव जैसे अनेक मरीजों की जान जीवनरक्षक ब्लड स्टेम सेल डोनेशन के बिना बचाई नहीं जा सकती और डोनर की खोज समय से लड़ने की शुरुआत के समान है। मैचिंग ब्लड स्टेम सेल डोनर तलाशने में जातीयता बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, इसलिए यह जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा भारतीय पंजीकरण कराके कैरव जैसे मरीजों को दूसरी जिंदगी देने की उम्मीद बढ़ाएं’’

डीकेएमएस बीएमएसटी फाउंडेशन इंडिया के सीईओ, पैट्रिक पॉल ने कहा, ‘‘आँकड़ों के मुताबिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के जरूरतमंद केवल 30 प्रतिशत मरीजों को ही अपने रिश्तेदारों में मैच मिल पाता है और 70 प्रतिशत मरीजों को दूसरे लोगों में डोनर तलाशना पड़ता है। भारत में हर साल खून की विकृति के लगभग 1 लाख नए मामले सामने आते हैं, जिससे इस बीमारी का भारत निरंतर बढ़ता रहता है।