राष्ट्रसंतश्री ने मन एवं आत्मा की भाव दशा को सदैव उन्नत रखने की दी सीख

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इंदौर। यहां श्री ह्रींकारगिरी तीर्थ धाम में 22 वर्ष पूर्व स्थापित श्री ह्रींकार पार्श्वनाथ प्रभु की प्रतिमा का 50 दिवसीय भव्यातिभव्य स्नात्र पूजन व 18 अभिषेक पूजन विधान, आरती व मंगल दीप आदि दूसरे दिन भी विधि विधान के साथ हुआ। यहां दिव्य भक्ति चातुर्मासार्थ विराजित विश्वविख्यात कृष्णगिरी पीठाधीपति राष्ट्रसंत डॉ वसंतविजयजी की निश्रा में विधि कारक हेमंत वेदमुथा मकसी द्वारा संगीतमय मंत्रोच्चारण एवं भजनों की प्रस्तुतियों के साथ हुआ।

नगीनभाई कोठारी चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस पर्व पर शनिवार को अभिषेक विधान के लाभार्थी शिल्पा विजय कोठारी परिवार वाले थे। इस अवसर पर डॉ वसंतविजयजी ने कहा कि मध्य प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी भी जैन मंदिर अथवा तीर्थ धाम में प्रतिष्ठापित प्रतिमा का 50 दिवसीय 18 अभिषेक महाविधान हो रहा है। जो कि स्वर्ण जल, रत्न जल एवं अनेक प्रकार के द्रव्य औषधियों के जल से विधि-विधान पूर्वक किया जा रहा है। यहां की श्वेत वर्णनीय 84 इंच 7 फीट की प्रभु पार्श्व की दिव्य प्रतिमा और अधिक तेजस्वी एवं ऊर्जावान होकर दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालुओं पर असीम कृपा बरसाएगी।

इस अवसर पर संतश्री ने संदेशप्रद वक्तव्य में कहा कि व्यक्ति के मन की निर्मल दशा ही स्वर्ग है और कुत्सित दशा ही नरक। उन्होंने कहा प्रत्येक इंसान के जब जैसे मनोभाव हुआ करते है, उसके आधार पर ही उसके आभामंडल का निर्माण हुआ करता है। यदि किसी व्यक्ति की भावनाएं निकृष्ट है तो उसका आभामंडल भी कलुषित हो जाता है। वसंतविजयजी ने कहा, यदि मन और आत्मा की भाव दशा उन्नत है तो व्यक्ति का आभामंडल भी निर्मल, पवित्र, सौम्य और श्वेत प्रकाश से भर जाता है। उन्होंने आगे यह भी कहा कि भगवान की प्रतिमा पत्थर अथवा किसी धातु की होती है लेकिन व्यक्ति जब अपने मनोभावों द्वारा आरोपण कर लेता है कि वह भगवान है तो उसमें भगवंता का निवास होने लग जाता है।

एक उदाहरण के साथ डॉ वसंतविजयजी ने कहा कि दुनिया के हर सफल पुरुष का इतिहास असफलताओं से भरा पड़ा है। किस्मत को कमजोर करने वाले वाक्यों को जीवन से हटाने की प्रेरणा देते हुए संतश्री ने कहा कि सफलता के शिखर को छूने के लिए सार्थक लक्ष्य बनाएं, बेहतर कार्य योजना बनाएं, निरंतर प्रयत्नशील रहे, धैर्य रखें तथा आत्मविश्वास को भी मजबूत रखना चाहिए। तीर्थधाम के ट्रस्टी विजय कोठारी ने बताया कि शनिवार को मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों तथा छत्तीसगढ़ प्रांत के रायपुर, महाराष्ट्र के मुंबई और गुजरात के बड़ौदा शहर से बड़ी संख्या में भक्तों ने राष्ट्र संतश्री के दर्शन-वंदन एवं प्रवचन श्रवण का लाभ लिया। विजय कोठारी ने बताया कि रविवार 21 जुलाई को दोपहर 3 बजे संतश्रीजी अपना दिव्य प्रवचन प्रदान करेंगे।

चातुर्मास पर्व से जुड़े वीरेंद्र जैन एवं जय कोठारी ने बताया कि ह्रींकारगिरी तीर्थ धाम में मंत्र शिरोमणि डॉ वसंतविजयजी की प्रेरणा से मनोरम, दर्शनीय व आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत दिव्य मंत्र शक्तियों से परिपूर्ण एक स्वर्ण मंदिर का निर्माण कराया गया है। जिसका विधिवत लोकार्पण भी शीघ्र ही होगा। उन्होंने बताया कि आगामी 5 अगस्त, नाग पंचमी से लक्ष्मी साधना का 21 दिवसीय कार्यक्रम विधि विधान से सर्व धर्म के शाकाहारी श्रद्धालुओं के माध्यम से होगा। इस आयोजन में माँ लक्ष्मी के ऐतिहासिक एक करोड़ आठ लाख दिव्य मंत्रो की साधना होगी, जो कि इंदौर के इतिहास में पहली बार होगी।

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