पागलपंती: घमा चौकडी से दूर पागलपंती, इदरीस खत्री द्वारा फिल्म समीक्षा

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निर्देशक – अनीस बजमी
अदाकार – जॉन एब्राहम, इलियाना डिक्रूज, अनिल कपूर, अरशद वारसी,कीर्ति खरबंदा, पुलकित शर्मा, उर्वशी रौतेला, सौरभ शुक्ला।
संगीत – हनी सिंह, मीत ब्रो. तनिष्क

फिल्म से पहले मुख्तसर चर्चा-

अनीस बजमी वेलकम-सींग इज किंग जैसी हास्य फिल्मे बना चुके है, लेकिन हास्य एक सबसे कठिन विधा है जिसमे दर्शको को बांधे रखने का जिम्मा लेखक और निर्देशक पर पूरी तरह से होता है। वैसे भी भारत मे बड़ी स्टारकास्ट की आड़ में कुछ भी अतार्किक परोस दो और हम उसे तार्किक मान कर हजम कर ले यह तो नही हो पाएगा। खैर इस बार अनीस लेखन और निर्देशन दोनों में गच्चा खा गए है, कॉमेडी फिल्मो की एक विडम्बना यह है कि इसमें ग्राफ लगातार ऊपर न जाए तो पूरी इमारत झूलने लगती है, कई बार हास्य फिल्मे तर्क से कोसों दूर होती है, लेकिन यहां हास्य में तर्क भूल कर उसे दर्शक हजम कर लेते हैं। लेकिन भारतीय दर्शक फिल्मो के मामले में इतने परिपक्व हो गए हैं कि अतर्क या गैर जरूरी बातें फौरन नकार देते है।

कहानी-

राज कंवर (पनोटी) बेड लक के बादशाह है उसके दो दोस्त जंकी (अरशद), चंदू (पुलकित) मिलते है तो बैडलक, पनोती, मनहूसियत की बाढ़ आ जाती है। अंडर वर्ल्ड डॉन राजा (सौरभ शुक्ला) अपने खास आदमी वाइफाई भाई (अनिल कपूर) से इन तीनो को उठवा लेता है और पनोती इन पर आ टिकती है।

अब तीन स्टार तो तीन हीरोइन होना भी लाजमी ही था तो गाने ठूंसने के लिए तीन हीरोइन भी भर दी गई। कुछ संवाद बेहद निचले स्तर के हैं जैसे मेरे पापा ने बोला कि किस करने से मैं प्रेंग्नेंट हो जाऊंगी। दूसरा हाफ पकड़ छोड़ता दिखता है लेकिन अनीस बजमी ने इतने सारे कलाकारों को अच्छा मैनेज करते हुए फिल्म को अंजाम तक पंहुचाया।

अदाकारी-

जॉन सत्य मेव जयते, बाटला हाउस में हंग किरदार में ज्यादा जमते है, अरशद वारसी, अनिल कपूर की कॉमेडी टाइमिंग लाजवाब है। लेकिन सौरभ शुक्ला इन सब पर भारी पड़े है, एक किरदार ललित मोदी (नीरव मोदी की कॉपी) इनामुल हक अपना असर छोड़ गए है। हिरोइंस को ग्लेमर बना कर रख दिया गया, इलियाना के अलावा बाकी जोड़ी भर्ती लगती है।

कमजोर कड़ी-

कहानी में सुस्ती दिखी, पटकथा कमजोर, फिल्म की अवधि 160 मिनट से कम की जा सकती थी।

गीत-संगीत

गाना तुम पर अटके यारा, दील भी मारे झटके, सलमान काजोल फिल्म का सदाबहार गाना रीमिक्स में वह मजा नही आया जो मौलिक में था, तेरा बीमार मेरा दिल भी दिल तक नही पहंुचता, क्या देश मे मौलिक गानों का अकाल पड़ गया हैं? जबकि पूरे विश्व में सबसे ज्यादा गाने हम ही देते है। वल्लाह वल्लाह गाना की धुन भी सुनी सुनाई लगती है, झुमका ठुमका हनी सिंह का गाना बस उतना ही याद रहता हैं जब तक वह चलता है, गाना खत्म होते ही आप भूल जाते हैं आप। साहब संगीत गानों ने फिल्म को केवल फिल्म में आइटम सॉन्ग की तर्ज पर समय बढ़ाया शेष कुछ नहीं।

बजट

फिल्म के स्टार कास्ट बड़ी होने से फिल्म का बजट लगभग 70 करोड़ गया हैं, प्रदर्शन एवं प्रचार 20 करोड़- कुल 90 करोड़। फिल्म के सेटेलाइट अधिकार 30 करोड़, डिजिटल अधिकार 20 करोड़, होम वीडियो के साथ संगीत अधिकार 10 करोड़, कुल 60 करोड़ कमाई प्रदर्शन पूर्व कर चुकी हैं। सिनेमाघर अधिकार भारत 50 करोड़, ओवरसीज 10 करोड़- कुल 60 करोड़, दोनों मिलाकर कुल 120 करोड़ रुपए फिल्म निकाल चुकी है।

फिल्म को हिट होने के लिए 130 करोड़, सुपर हिट के लिए 150 करोड़, ब्लॉक बस्टर के लिए 200 करोड़ की कमाई करनी पड़ेगी। फिल्म के ट्रेलर को देखते हुए लग रहा हैं कि पहले दिन 11 से 15 करोड़ की ओपनिंग ले सकती है।
फिल्म को 2.5 स्टार्स

फिल्म समीक्षक
इदरीस खत्री

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