देश में आज यानि 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्म दिवस के मौके पर समुचे भारत में उनकी जयंती के रुप में मनाया जा रहा है। इसी अवसर पर प्रदेश भर में 638 आजीवन कारावास एवं सजायाफ्ता बंदियों को रिहा कर दिया गया हैं। वही मध्यप्रदेश के सतना जिलें के केंद्रीय जेल से आज 62 बंदियों को रिहा करा है। जिनमें 61 पुरुष बंदी और एक महिला बंदी शामिल है।

कैदियों के परिजन हुए बेहद खुश

केंद्रीय जेल में बंद सतना जिले के 22, छतरपुर के 23, पन्ना के 13, दमोह का 1, रीवा के 2, बंदा उत्तर प्रदेश के एक सजायाफ्ता बंदी की रिहाई की गई। आज गांधी जयंती के अवसर पर बंदियों को जेल से आजादी मिलने पर उनके परिजन और बंदी बेहद खुश नजर आए। बंदियों को आजादी के साथ ही केंद्रीय जेल सतना से फलदार वृक्षों के पौधे भी दिए गए। जिस प्रकार फलदार वृक्ष पत्थर लगने के बाद भी फल हमेशा मीठा ही देता है उसी प्रकार बंदियों को यह वृक्ष देकर समाज में अच्छे कार्य करने और गांधी जी के द्वारा बताए गए सत्य अहिंसा के पथ पर चलने की अपील भी की गई है।

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साढ़े 14 साल बाद मिलूंगा अपने परिवार से

रिहाई के बाद जेल में बंद आजीवन कारावास सजा काट रहे छतरपुर के निवासी धीरज गुप्ता ने बताया कि साढ़े 14 साल में मेरी रिहाई हुई है। पूर्व में 15 अगस्त, 26 जनवरी एवं अंबेडकर जयंती को बंदी रिहा होते थे। लेकिन अब गांधी जयंती पर मुझे रिहाई मिली है। हम सभी बंदियों से अपील करते हैं कि सभी सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलेंगे। मुझे समाज से एक मुख्य धारा से जोड़ने का अच्छा अवसर मिला है। साढ़े 14 साल बाद अपने परिवार से मिलूंगा और अब समाज मे अच्छे कार्य करूंगा।

चार अवसर हुए प्राप्त

केंद्रीय जेल के जेलर रामकृष्ण चौरे ने बताया कि 15 अगस्त और 26 जनवरी के अलावा अब बंदियों की रिहाई के चार अवसर प्राप्त हुए। इसमें 14 अप्रैल अंबेडकर जयंती और 2 अक्टूबर गांधी जयंती पर बंदियों की रिहाई की जाएगी। पूरे प्रदेश में 638 बंदी रिहा हो रहे हैं। बंदी काफी उत्साहित हैं. सतना केंद्रीय जेल से 61 पुरुष बंदी और एक महिला बंदी महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर रिहा किया गया है।