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महावीर जयंती: बौद्ध और जैन धर्म का तुलनात्मक अध्ययन | Mahavir Jayanti: Comparative Study of Buddhism and Jainism

Posted on: 17 Apr 2019 16:12 by Surbhi Bhawsar
महावीर जयंती:  बौद्ध और जैन धर्म का तुलनात्मक अध्ययन | Mahavir Jayanti: Comparative Study of Buddhism and Jainism

नीरज राठौर की कलम से

भगवान महावीर और बुद्ध के सिद्धांतो और शक्ल सूरत मे काफ़ी समानता है।दोनो अहिंसा को परम धर्म मानते है। बुद्ध का बचपन का नाम गौतम है, महावीर के शिष्य का नाम भी गौतम था। महावीर के पिता का नाम सिद्धार्थ था, बुद्ध का एक नाम सिधार्थ भी है। महावीर के परम शिष्य का नाम आंनद था, बुद्ध के भी, महावीर की पत्नी का नाम यशोधरा था। गौतम बुद्धा की पत्नी का नाम यशोदा था, दोनों का जन्म एवं प्रचार क्षेत्र बिहार था। दोनो के धर्म ग्रंथ मे आठ राजाओ का संन्यास लेने का वर्णन है।

दोनों धर्मो में काफी समानताए एवं असमानताए है :-

समानताए

  1. दोनों धर्मो ने वैदिक कर्मकांड, यज्ञ सम्बन्धी आडंबरो और धार्मिक रुढियो का विरोध किया।
  2. दोनों धर्मो ने ईश्वर के अस्तित्व को महत्व प्रदान नहीं किया था।उन्होंने वेदों और उपनिषदों की प्रमाणिकता को भी अस्वीकार किया।
  3. कर्म और पुनर्जन्म के सिध्दांतो को दोनों स्वीकार करते थे।
  4. दोनों धर्मो ने नैतिक आचरण से सम्बन्धित को अपने जीवन में उतारने का उपदेश दिया।
  5. बुद्ध और महावीर दोनों ही क्षत्रिय राजकुमार थे।उन्होंने पुरोहितो के धार्मिक महत्त्व को अस्वीकार किया। एवं समानता पर आधारित धर्म की स्थापना की।
  6. दोनों धर्म सदाचारी और व्याव्हारिक थे।
  7. जाति प्रथा,छुआछूत और समाजिक भेद-भाव का दोनों धर्मो ने विरोध किया. उन्होंने मोक्ष के द्वार सभी जातियो के लिए खोले।
  8. धर्म प्रचार के लिए दोनों ने लोक-भाषाओ का उपयोग किया।
  9. बौद्ध धर्म “बुद्ध” और “संघ” तथा जैन धर्म “दर्शन”, “ज्ञान” और “चरित्र”के रत्नों को मानता है।
  10. दोनों धर्म जन्म-मरण के चक्र के आत्मा को छुटकारा दिलाना चाहते थे और मोक्ष ही उनका लक्ष्य था।

असमानतायें

  1. जैन धर्म कठोर तप और उपवास में म्रत्यु को श्रेष्ठ मानता था. बौद्ध इनमे विश्वास नहीं करते थे।
  2. जैन धर्म में अहिंसा को सरवोच्च महत्व दिया गया था, जबकि बौद्ध दुसरो के व्दारा की गई हिंसा के विरोधी नहीं थे।
  3. बौद्ध धर्म ‘संघ’ और ‘भिक्षुओ’की शक्ति पर आधारित रहा। जैन धर्म में ग्रहस्थ और भिक्षुओ में कम अंतर है।
  4. बौद्ध संसार को परिवर्तनशील और नाशवान मानते है।जैन उसे नित्य, अनादि और अनन्त मानते है।
  5. जैन आत्मवादी होने से आत्मा की अपरिवर्तनशीलता को मानते है, जबकि बौद्ध अनात्मवादी होने से उसे परिवर्तनशील बतलाते है।
  6. बौद्ध मोक्ष के व्दार अस्तित्व से छुटकारा मानते है, जबकि जैन शरीर से छुटकारा पाने को मोक्ष कहते है।
  7. बौद्ध बुद्ध की शरण में विश्वास करते है. उन्होंने उनकी अश्थियों को पूजनीय माना। जैन इस प्रकार के किसी तत्व को नहीं मानते।
  8. जैन धर्म हिन्दू धर्म के अधिक निकट है. बौध्द धर्म ने उसका बहिष्कार किया। जैन धर्म में चौबीस तीर्थकर हुए जबकि बौद्ध धर्म के प्रवर्त्तक मात्र बुध्द थे।
  9. बौद्ध धर्म जैन धर्म की अपेक्षा अधिक सरल और व्याव्हारिक होने से भारत और विदेशो में भी फैला।वह एक इंटरनेशनल धर्म बना जबकि जैन-धर्म भारत तक ही सिमित रहा।

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