“लड़की”

मीना शर्मा

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girls

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हँसती है ये लड़की
दौड़ती हुई खेतों की मेंड़ों पर…
उगते हुए काँसों पर ,
नुकीली हरी सुइयाँ,
दिखती तो हैं, महसूस नहीं होतीं !
फूट आता है रक्त,
नरम तलवों से !
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गाते रहते हैं ‘अधर’
प्रेम-गीत….!
ताल देती है पायल,
छनकती हुई !
बड़ी ……दूर है,
गाँव पिया का !
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मिलते हैं पंख मोर के
झुकती हैं डालियाँ ‘बबूल’ की,
पीले फूलों से भरी…
देख लेना ,
सूरज के साथ दौड़ती
लड़की
साँझ से पहले ,
पहुँच ही जाएगी ,
क्षितिज तक ।।