करवा चौथ: इन बातों को भी जरूर रखें ध्यान, नंबर 6 व्रतधारी के लिए है सबसे खास

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करवा चौथ एक हिंदू त्योहार है जो कि उत्तर भारत में बहुत मुख्य रूप से धूमधाम और उत्साह से मनाया जाता है। ये त्योहार विवाहित दंपत्तियों के बीच प्यार को मजबूत करता है यह त्योहार सूर्य उदय होने से पहले सरगी से शुरू होता है जो कि हर सास अपनी बहू को देती है। सरगी में खाने की वस्तुएं शामिल होती हैं जिसे कि सूर्य के उदय होने से पहले खाया जाता है। करवा चौथ हाथों पर मेहंदी लगाने और पारंपरिक वस्त्रों को पहने हुए चांद का इंतज़ार करने जैसे पारंपरिक प्रतिकात्मकताओं को साथ लेकर आता है। एक बार जब चांद निकल आता है, तो चाँद को देख कर पति के हथो से जल ग्रहण करने के बाद व्रत समाप्त हो जाता है।

इस व्रत से जुड़ी कई खास बात हैं जो व्रत करने वाली महिलाओं को जरुर मालूम होनी चाहिए।

1- करवा एक पानी से भरे छोटे मिट्टी के बर्तन का अनुवाद है और चौथ का हिंदी अर्थ ‘चौथा’ होता है जो कि यह दर्शाता है कि ये त्योहार कार्तिक महीने के चौथे दिन पड़ता है। यह दिवाली से नौ दिन पहले मनाया जाता है। 

2- यह व्रत सिर्फ पति की रक्षा करने के लिए ही नहीं जाना जाता है लेकिन वैज्ञानिक तौर पर भी साबित हो चुका है कि यह व्रत महिला के शरीर को भी मदद करता है। यह आत्म-नियंत्रण और ध्यान को स्थापित करता है और पाचन तंत्र को पवित्र करता है।

3- करवा चौथ एक रानी वीरावती की कहानी के साथ जुड़ा हुआ है। वीरावती अपने पहले करवा चौथ के लिए अपने माता-पिता के घर आती है और इस दिन उसने व्रत का सख्ती से पालन किया। सात बहनों की इकलौती बहन होने के कारण, उसकी प्यास और भूख असहनीय हो गई और उसके भाई अपनी बहन को इस हालत में नहीं देख सके। उसे बीमार होने से बचाने के लिए, उन्होंने चांद का एक नकली प्रतिबिंब बनाया और उसे देखकर वीरावती ने अपना व्रत तोड़ लिया। जैसे ही उसने ऐसा किया, उसके राजा की मृत्यु की खबर आ गई। उसने फिर से वैसा ही व्रत किया और देवी से कहा कि उसके भाईयों ने उसके साथ धोखा किया था। उसका प्रेम और भक्ति देखकर, उसके राजा को फिर से उसकी ज़िंदगी वापिस मिल गई।

4- एक और कहानी जिसने करवा चौथ की परंपरा को जन्म दिया वह एक करवा नाम की औरत की है जो कि अपने पति से बिना किसी शर्त के प्यार करती थी और उसके स्वास्थय और खुशी के लिए जो भी संभव हो सके करती थी। इस अत्यधिक प्रेम ने उसे कुछ अध्यात्मिक शक्तियां दे दी और उसने उनका इस्तेमाल अपने पति को मगरमच्छ से बचाने के लिए किया, जब वह नदी में नहा रहा था। उसने यम को शाप की धमकी दी और भगवान को मगरमच्छ को नरक में भेजने के लिए कहा। यह दिन उसकी भक्ति को समर्पित है।

5- अविवाहित महिलाएं जो कि करवा चौथ का व्रत रखती हैं उन्हें चांद के चमकने का इंतज़ार करने की ज़रुरत नहीं है। जब सूर्य अस्त हो जाए और आकाश में तारे दिखाई देने लगें, वह कुछ खाकर अपना व्रत तोड़ सकती हैं।

6- इस दिन, सभी विवाहित महिलाएं पानी से भरे एक मिट्टी के बर्तन को बीच में रखकर एक प्रार्थना सुनती हैं जिसे ‘कथा’ कहा जाता है। प्रत्येक महिला अपने साथ एक थाली रखती है जिसे की प्रार्थना के एक भाग की तरह एक खास तरीके से बदला जाता है।

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