Indore : नए कंद की आवक से साबूदाना नवरात्रि पूर्व ही हुआ सस्ता – गोपाल साबु

फलाहारी व्यंजन बनाने के लिए प्रसिद्ध सच्चामोती तथा सच्चासाबु एगमार्क साबूदाना नवरात्री पर व्रत – उपवास के साथ ही दिवाली दशहरा जैसे आने वाले त्यौहारों पर ग्राहकों के नाश्ते की पहली पसंद बनाता जा रहा है

सेलम/इंदौर 23 सितम्बर 2022 फलाहारी व्यंजन बनाने के लिए प्रसिद्ध सच्चामोती तथा सच्चासाबु एगमार्क साबूदाना नवरात्री पर व्रत – उपवास के साथ ही दिवाली दशहरा जैसे आने वाले त्यौहारों पर ग्राहकों के नाश्ते की पहली पसंद बनाता जा रहा है, खासकर इसलिए कि साबूदाना ऐसा फलाहारी उत्पाद है जो भाप से भी पकाया जा सकता है। साबूदाने का मुख्य सीज़न सावन से शुरू होकर नवरात्रि तक होता है। इसके पश्चात महाशिवरात्रि के अवसर पर भी साबूदाने की बिक्री और खपत बढ़ती है।

साबू ट्रेड सेलम के मैनेजिंग डायरेक्टर गोपाल साबु के अनुसार – साबूदाने का भाव अगले कुछ समय तक काफी कम रहने की पूरी संभावना है. देश के सबसे बड़े साबूदाना उत्पादक केंद्र सेलम, तमिलनाडु, जहां और आसपास टेपीयोका कंद बहुतायत में पाया जाता है, वहाँ इस वर्ष की फसल अच्छी बारिश के चलते समय से पहले आ गई है और अनुमान से अधिक सस्ती हो गई है।

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कंद के भाव गत महीने उच्चतम करीब 450 रु प्रति पाइंट अर्थात करीब 6000 रु प्रति टन के थे, जबकि वर्तमान मे घट कर अभी करीब 380 प्रति पाइंट अर्थात करीब 5100 रु.प्रति टन हैं। गोपाल साबु ने नए कंद की आवक से खेरची दामों पर पड़ने वाले असर के बारे में कहा कि हमने उत्पादक मंडी में दाम कम होने का फायदा तुरंत अपने थोक और खेरची विक्रेताओं तक पहुंचाने का निर्णय लिया है ताकि वे इसका लाभ उपभोक्ता तक नवरात्रि की बिक्री में पहुंचा पायें।

स्टॉक के बारे में उनका कहना है कि अगस्त के अंतिम सप्ताह में साबुदाना सेलम सोसायटी में करीब तीन लाख बोरी (90 किलो की) और फैक्ट्रियों तथा स्थानीय स्टाकिस्टों के पास करीब पांच लाख बोरी (90 किलो की) अनुमानित है। साबूदाने की माँग से यह स्पष्ट हो गया है कि कोरोना के कारण मंदिरों और अन्य स्थानो पर इसके सार्वजनिक उपयोग में जो कमी आई थी वह एक बार फिर ज़ोर पकड़ने लगी हे।

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कोरोना काल ने साबूदाना को एक नए नाश्ते के रूप में स्थापित किया है। उस अवधि में भी इसकी बिक्री बढ़ी है और भविष्य के लिए यह नाश्ते के बेहतर विकल्प के तौर पर तैयार हुआ हे। गोपाल साबू ने कहा कि यह इस बात से साबित होता हे क़ि उस अवधि में तो इसकी माँग रही ही उसके बाद भी औसत 20 फ़ीसदी से इसकी माँग बढ़ी है। इस अवधि में नियमित साबूदाना के साथ इसके दूसरे स्वरूप जैसे खीरदाना, फुलदाना तथा साबूदाना पापड़ आदि की माँग भी बढ़ी है।

साबु जी ने बताया कि इस नवरात्रि पर साबु ट्रेड अपने प्रसिद्ध कुकरीजाॅकी पॅाजीटिव मीलेट की पांचों प्रकार जैसे “मोरधन, कोदरा, झंगोरा, कंगनी व रागी “की स्वादिष्ट फरियाली खिचड़ी बनवा कर इन्दौर के उपभोक्ताओं को खिलाने के साथ मीलेट के विभिन्न प्रकार, उपयोग और महत्व के बारे में एक संक्षिप्त पुस्तिका का भी नि:शुल्क वितरण करने का विचार किया है, ताकि मीलेट के स्वास्थ्यवर्धक महत्व और इसके गुणकारी लाभों को समझ कर हम अपने प्रतिदिन के भोजन में इस सात्विकता का लाभ उठा सकें। साबु ट्रेड द्वारा यह पुस्तिका वेब पर भी उपलब्ध करवाई गई है जिसे https://sabuindia.in/Sabu-About-Millet-Handbook-Hindi.pdf से डाउनलोड किया जा सकता है ।

Source : PR