इंदौर : भारत को G20 प्रेसीडेंसी मिलने के अंतर्गत भारतीय प्रबंधन संस्थान इंदौर (IIM Indore) कई आयोजनों के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कई भागीदारों के साथ आयोजन और सहयोग करेगा। आरंभिक कार्यक्रम के रूप में, आईआईएम इंदौर अपने अंतरराष्ट्रीय भागीदार, ग्लासगो विश्वविद्यालय के साथ अर्थशास्त्र के जनक एडम स्मिथ की 300वीं जयंती मना रहा है। संस्थान ने विभिन्न संयुक्त कार्यक्रमों और दोहरी डिग्री कार्यक्रमों की पेशकश करने के लिए अगस्त 2022 में ब्रिटेन के इस चौथे सबसे पुराने विश्वविद्यालय, ग्लासगो विश्वविद्यालय के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे और अब दोनों शैक्षणिक संस्थान कई मोर्चों पर सहयोग कर रहे हैं।

इस भागीदार विश्वविद्यालय के साथ अपने संबंधों को मजबूत करते हुए, आईआईएम इंदौर ने 09-11 जनवरी, 2023 को कैंपस में ग्लासगो विश्वविद्यालय की टीम की मेजबानी की। आईआईएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमाँशु राय के साथ कई अंतर्दृष्टिपूर्ण चर्चाओं और विचार-मंथन के अलावा, टीम ने आईआईएम इंदौर के विभिन्न डीन और प्रोग्राम चेयर्स के साथ भी बातचीत की। उन सभी विषयों पर चर्चा हुई जिनपर दोनों संस्थान समझौता ज्ञापन के एक हिस्से के रूप में योजना बना सकते हैं और भारत और यूके संबंधों को मजबूत करने में योगदान दे सकते हैं। आईआईएम इंदौर के डॉक्टरेट स्टूडेंट्स को भी टीम के साथ बातचीत करने का मौका मिला और विश्वविद्यालय में नौकरी के अवसरों के बारे में जानकारी मिली।

एडम स्मिथ, जो ग्लासगो विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र भी हैं, के 300वें जन्म वर्ष के जश्न के हिस्से के रूप में, ‘स्मिथ अराउंड द ग्लोब लेक्चर सीरीज़’ शीर्षक वाली पहली व्याख्यान श्रृंखला, 10 जनवरी को आईआईएम इंदौर में आयोजित की गई। यह श्रृंखला 20 देशों में आयोजित की जानी है, और इस प्रकार, सबसे पहले आईआईएम इंदौर में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम ने भारत को इस कार्यक्रम का आयोजन करने वाला पहला देश बना दिया है।

श्रृंखला का उद्घाटन आईआईएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमाँशु राय ने किया। इस सीरीज में भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी अनंत नागेश्वरन ने समुदाय के साथ ऑनलाइन बातचीत की। अन्य वक्ताओं में डॉ. जॉन फिंच, मार्केटिंग के प्रोफेसर और हेड – एडम स्मिथ बिजनेस स्कूल, ग्लासगो विश्वविद्यालय; प्रो. एलेक्स थॉमस, स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड साइंस, अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय; और प्रो. शुभाशंकर चट्टोपाध्याय, आईआईएम इंदौर संकाय शामिल थे।
अपने उद्घाटन भाषण में, प्रो. हिमाँशु राय ने ग्लासगो में आयोजित COP26 शिखर सम्मेलन में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय वक्तव्य के रूप में प्रस्तुत पांच सूत्रीय एजेंडा, ‘पंचामृत’ का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि पंचामृत प्रतिज्ञा की तरह आईआईएम इंदौर ने 2019 में राष्ट्र निर्माण में अपने योगदान के पांच क्षेत्रों की पहचान की थी और इन क्षेत्रों में चुनौतियों को हल करने का संकल्प लिया था। ‘हमारा उद्देश्य वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने वाले ज्ञान का निर्माण, अभ्यास और प्रसार करना है। इनमें आय असमानता, ग्रामीण मुद्दे, शहरी प्रबंधन की समस्याएं, पर्यावरण और स्थिरता की चुनौतियां और उद्यमिता संस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता शामिल हैं। ‘वैश्वीकरण ने आय असमानता में वृद्धि की है, और इस प्रकार, आईआईएम इंदौर वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने के लिए वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट प्रोग्राम में राज्य सरकार की मदद कर रहा है’। उन्होंने कहा कि हम महिलाओं के लिए विभिन्न वित्तीय साक्षरता कार्यशालाएं भी आयोजित करते हैं।

उन्होंने बताया कि आईआईएम इंदौर का रूरल एंगेजमेंट प्रोग्राम विद्यार्थियों को गांवों में रहने, ग्रामीण निवासियों की चुनौतियों को समझने और उनकी समस्याओं का समाधान खोजने के लिए एक मंच देता है, जो छात्रों को जमीनी अनुभवों से सीखने में सक्षम बनाता है। यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत में लगभग 833 मिलियन लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, और हमें उनकी समस्याओं का समाधान करने की आवश्यकता है जो शहरी क्षेत्रों की तुलना में बहुत भिन्न हैं, उन्होंने कहा।
शहरी क्षेत्रों में यातायात प्रबंधन की समस्याओं के बारे में, प्रो. राय ने कहा कि आईआईएम इंदौर ने मध्य प्रदेश सरकार को एक रिपोर्ट भी सौंपी है ताकि उन्हें यातायात प्रबंधन प्रणाली को सुधारने और सड़क दुर्घटनाओं की संख्या को कम करने के तरीकों पर काम करने में मदद मिल सके।

‘आईआईएम इंदौर WASH – जल, स्वच्छता और हाइजीन (सफाई) पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक उत्कृष्टता केंद्र – सेण्टर ऑफ़ एक्सीलेंस भी स्थापित कर रहा है, और स्वच्छता प्रणाली को मजबूत करने के लिए, अपने अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर देश भर में 4800 शहरी स्थानीय निकाय – यूएलबी को प्रशिक्षित करेगा। उन्होंने कहा कि इस पहल में हमारे सहयोगी विश्वविद्यालयों में से एक ग्लासगो विश्वविद्यालय भी है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस WASH पर ध्यान केंद्रित करने वाले स्टार्टअप्स को भी इनक्यूबेट करेगा।

डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने वर्तमान समय में एडम स्मिथ की प्रासंगिकता के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि जबकि अर्थव्यवस्थाएं कभी भी पूरी तरह से बाजार की ताकतों पर निर्भर नहीं होतीं, वहां उत्पादकों और विक्रेताओं के बीच सही प्रतिस्पर्धा या संतुलन होता है। ‘इस परिपेक्ष्य में एक सीमा तक एडम स्मिथ का ‘इनविजिबल हैण्ड’ एक आदर्श आर्थिक सिद्धांत होने की शर्तों को पूरा करता है जो वास्तविक दुनिया या एक पोषित लक्ष्य का विश्लेषण करने में मदद करता है जो व्यावहारिक रूप से प्राप्य हो सकता है’। उन्होंने कहा कि अर्थशास्त्र के बिना राजनीति हो सकती है, लेकिन राजनीति के बिना कोई अर्थशास्त्र नहीं है। ‘अर्थशास्त्र को उसके संदर्भ से बाहर नहीं किया जा सकता है। यह उस संबंध में भौतिक विज्ञान से भिन्न है। विज्ञान के नियम अपरिवर्तनीय हैं, लेकिन आर्थिक सिद्धांत उस संदर्भ में होते हैं जिसमें वे काम करते हैं – और यही कारण है कि एडम स्मिथ के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं’, उन्होंने कहा।

डॉ. जॉन फिंच ने ‘एडम स्मिथ की एजेंसियां और सॉफ्ट पॉवर्स’ के बारे में बात करते हुए साझा किया कि कैसे स्मिथ की दक्षता एक प्रभाव बनाने, सही निर्णय लेने और विचार प्रक्रियाओं और कार्य करने की क्षमता ऐसी शक्तियां हैं जो उल्लेखनीय हैं । शिक्षा, राज्य द्वारा वित्तपोषित शिक्षा और पाठ्यचर्या को आकार देने के लिए फीस देने वाली व्यावसायिक शिक्षा पर स्मिथ के रोमांचक विचारों ने भी आधुनिक शिक्षा प्रणाली को बदल दिया है। ‘एक नागरिक के रूप में, स्मिथ ने शिक्षा क्षेत्र के अलावा श्रम विभाजन सहित कई सामाजिक सुधारों में योगदान दिया। वह आज भी हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।’

प्रो. एलेक्स थॉमस ने एडम स्मिथ और शास्त्रीय राजनीतिक अर्थव्यवस्था के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि एडम स्मिथ की अवधारणाओं की आज आमतौर पर गलत व्याख्या की जाती है । अतः उस संदर्भ को समझना आवश्यक है जिसमें स्मिथ ने अपनी अवधारणाएँ लिखीं। इसके लिए आज के अर्थशास्त्र के बौद्धिक परिदृश्य पर ध्यान देना अनिवार्य है, जिसे मुख्य रूप से आपूर्ति और मांग दृष्टिकोण के रूप में ही समझा जाता है। उन्होंने कहा कि स्मिथ का मानना था कि शिक्षा को सार्वजनिक रूप से समर्थन दिया जाना चाहिए और यह नैतिक और सामाजिक लाभों की कुंजी है। ‘स्मिथ ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान प्राप्त करने, नैतिक भावनाओं को समझने और व्यक्ति को आत्म-सम्मान प्राप्त करने में मदद करती है’, प्रो. थॉमस ने समझाया।
प्रो. शुभाशंकर चट्टोपाध्याय ने स्मिथ के ‘इनविजिबल हैण्ड’ और मूल्य सिद्धांत के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि यह अवधारणा कैसे उभरी और कैसे इसने एक ऐसे अंत को बढ़ावा दिया जिसका वास्तव में कोई इरादा नहीं था। ‘दक्षता और इक्विटी के बीच तनाव को हल करना महत्वपूर्ण है। जबकि दक्षता अपव्यय पर ध्यान केंद्रित करती है, इक्विटी उन लोगों की विविधता पर निर्भर करती है जो आंतरिक रूप से भिन्न हैं और अलग होना चाहते हैं और आय, उपभोग, धन और अवसरों के संदर्भ में परिभाषित हैं’, उन्होंने कहा।

लाइफलॉन्ग लर्निंग और इंटरनेशनल डेवलपमेंट ऑफिस की प्रमुख डॉ. जियांग ली ने भी आईआईएम इंदौर समुदाय के साथ बातचीत की। उन्होंने आईआईएम इंदौर आने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने ग्लासगो विश्वविद्यालय, उसकी विभिन्न पहलें और एडम स्मिथ के साथ उसके संबंध की जानकारी दी। प्रो. प्रीतम रंजन, डीन-रिसर्च, आईआईएम इंदौर ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया। फैकल्टी, छात्रों और कर्मचारियों सहित पूरे आईआईएम इंदौर समुदाय ने कार्यक्रम में भाग लिया।

ग्लासगो विश्वविद्यालय की टीम की तीन दिवसीय यात्रा अत्यंत लाभकारी रही । इस अवसर पर उपरोक्त टीम सदस्यों के अलावा ग्लासगो विश्वविद्यालय से डॉ. बेलजिन ओके-सोमरविल और डॉ. न्यूरन अक्यू, भी मौजूद रहे । आईआईएम इंदौर अपने अन्य विदेशी सहयोगियों की मेजबानी करने और आने वाले दिनों में जी20 प्रेसीडेंसी के एक भाग के रूप में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करने के लिए उत्सुक है।