गृहमंत्री जी अपने प्रभार के जिले को भी देख लो

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करीब आठ महीने पहले इंदौर में ही नही पूरे प्रदेश को क्राइम स्टेट बोलकर कांग्रेस के नेता बहुत चिल्लाते थे। लेकिन 7 माह पहले प्रदेश में बदलाव हुआ। प्रदेश में चिल्लाने वाले कांग्रेसियों का निजाम आया। निजाम बदला तो इंदौर के भी हालत बदलने की एक दिलासा थी। नई सरकार में इंदौर की जिम्मेदारी प्रदेश के गृहमंत्री बनाए गए बाला बच्चन को सोंपी गई। लगा अब तो हालात बदल जाएंगे।

लेकिन छह माह में हालात तो नही बदले लेकिन उल्टा ही होता दिख रहा है। इंदौर में बीते छह माह में क्राइम कम तो नही हुआ उल्टा चाकूबाजी, लूट, खुलेआम गुंडागर्दी जरूर बढ़ गई। बीते 3 दिनों के हालात पर नजर डालें तो शहर में चल रही गुंडों की हुकूमत का अन्दाज साफ लग जाएगा। एक दिन में 7 जगह चाकूबाजी हुई और कथित हुक्मरान केवल देखते रहे। उसके दूसरे दिन जनसेवा देशभक्ति का लोगो हाथ पर लगाकर खड़े वर्दीधारियो ने जिस तरह से युवक की पिटाई की ओर महिला को सड़क पर घसीटा ये जनता के सेवक कम और किसी ठाकुर की ड्योढ़ी पर खड़े जरखरीज गुलाम लठैत ज्यादा दिख रहे हैं।

ये सब उस शहर के हालात हैं, जिसकी जिम्मेदारी कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले गृहमंत्री के प्रभार ओर निवास के जिले की है। पूरे इंदौर में अराजकता फैली है। और अफसर केवल लाइन अटैच कर अपना काम खत्म कर देते है। क्या लाइन अटैच करने से किसी आम आदमी का खोया सम्मान वापस दे सकते है। क्या किसी महिला को उसका खोया सम्मान लाइन अटैच से दोबारा मिल जाएगा। इंदौर में रोज ब रोज हालात भयावह होते जा रहे हैं और प्रभारी मंत्री गायब हैं। टिक्कड़ बनाने वालों के जैसे हाथ घुमाते दिनभर कमलनाथ चालीसा पढ़ने से थोड़ी फुर्सत निकाल लो प्रभारी मंत्री जी। इंदौर को न तो ऐसे नेता चाहिए और न ऐसे अफसर जिनकी किसी तरह की कोई कमांड अपने अधीनस्थों पर न हो।

यदि नेता अपने अधीन अफसरों से शहर को लेकर सवाल नही कर सकते और अफसर अपने मातहतो पर काबू नही रख सकते तो हमे न तो ऐसे नाकाबिल नेता चाहिए और न ही ऐसे नकारा अफसर। नाक़ाबिलो नकाराओ का बोझ हम क्यो ढोए? यदि ये लोग शहर में कानून व्यवस्था नही बना सकते तो इन्हें शहर में रहने का हक़ नही है। पुलिस की सख्ती के नाम पर गुमटी ठेले वालो, राह से गुजरनेवाले गाड़ी चालको, गरीबो को सताने, उन्हें बर्बाद करने पर दिखने के बजाए गुंडों पर पुलिस कभी नही दिखती। उल्टा उनके साथ गलबहियां करते घूमते दिखते हैं। भोपाल के ए सी ऑफिस में बैठकर अन्य प्रदेशों में हुई घटनाओं पर दुख जताने वाले “साहब” आपके प्रदेश की जनता की फिक्र कर लो। वरना ये जनता एक बार तो बता चुकी है दूसरी बार भी आपको आपकी हैसियत बताने में गुरेज नही करेगी।

- बाकलम - नितेश पाल

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