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सुनी-सुनाई : खबरों के केन्द्र में नरोत्तम

आजकल मप्र की राजनीति में गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा सबसे अहम हो गये हैं। मीडिया उनकी हर हरकत पर पैनी नजर बनाये हुए है। पिछले दिनों केन्द्रीय राज्यमंत्री प्रहलाद पटेल ने भोपाल में पत्रकारों को डिनर पर बुलाया।

रवीन्द्र जैन
आजकल मप्र की राजनीति में गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा सबसे अहम हो गये हैं। मीडिया उनकी हर हरकत पर पैनी नजर बनाये हुए है। पिछले दिनों केन्द्रीय राज्यमंत्री प्रहलाद पटेल ने भोपाल में पत्रकारों को डिनर पर बुलाया। इस डिनर में प्रदेश के एकमात्र मंत्री नरोत्तम मिश्रा पहुंचे तो अटकलें शुरू हो गईं कि पटेल और मिश्रा कुछ खिचड़ी पका रहे हैं। बीते इतवार को नरोत्तम मिश्रा विशेष विमान से दिल्ली गये तो मप्र में सीएम बदलने की अफवाह फैलने लगीं। इस पर नरोत्तम को सफाई देनी पड़ी। इसी सोमवार को गृह विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री समय से पहुंचे और गृहमंत्री का दस मिनट इंतजार कर उनकी अनुपस्थिति में समीक्षा शुरू कर दी तो फिर इन दोनों नेताओं के बीच तल्खी की खबरें तेज हो गईं हैं।

मंत्राणी से घबड़ाते आईएएस आईपीएस
मप्र की एक महिला मंत्री के विभाग में सचिव या संचालक के पद पर जाने से आईएएस और आईपीएस घबड़ाने लगे हैं। सरकार यदि मंत्राणी के विभाग में इनकी नियुक्ति भी कर दे तो वे मंत्राणी से पीछा छुड़ाने की जुगाड में लग जाते हैं। मंत्राणी के पास दो विभाग खास हैं। पिछले पौने दो साल में उनके एक विभाग में तीन संचालक बदल चुके हैं। जबकि दूसरे विभाग में चार सचिव बदले जा चुके हैं। मजेदार बात यह है कि मंत्राणी की छवि ईमानदार राजनेता की है, लेकिन उनके व्यवहार के कारण अधिकारी उनके साथ काम करने से घबड़ाते हैं। एक समय इन विभागों में पदस्थ होना मजा माना जाता था, लेकिन अब यहां पदस्थ होना सजा माना जा रहा है।

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कुत्ते का जन्मदिन
मप्र में नेताओं के जन्मदिन के बड़े-बड़े होर्डिंग्स देखकर लोग परेशान होने लगे हैं। बालाघाट के लोगों ने इस समस्या का अजीब समाधान निकाला है। इस सप्ताह प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री के जन्मदिन को लेकर पूरे शहर को होर्डिंगों से पाट दिया गया। जहां देखों नेताजी के बड़े-बड़े होर्डिंग्स नजर आ रहे थे। लोगों ने इन होर्डिंग्स के बगल में कुत्ते के फोटो के साथ बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगा दिए और लिख दिया कि आज उनके कुत्ते का जन्मदिन है इस पर कुत्ते को बहुत-बहुत बधाई। यही नहीं कुछ लोगों ने तो नेताजी के जन्मदिन समारोह के समानांतर कुत्ते के जन्मदिन का समारोह कर कुत्ते से केक भी कटवा डाला।

बहुत तेज बेटिंग कर रहे हैं मंत्रीजी
“पाला बदल” अभियान से भाजपा को मिले एक मंत्रीजी आजकल बहुत तेज बेटिंग करने के कारण चर्चा में हैं। खबर आ रही है कि मंत्रीजी ने अपने विभाग के कुछ तबादलों के प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समन्वय में भेजे थे। सीएम की मंजूरी मिलने के बाद भी मंत्री जी ने दान दक्षिणा की प्रक्रिया पूरी होने तक आदेश अटका कर रखे। अफसरों ने इसकी शिकायत ऊपर तक पहुंच दी है। खास बात यह है कि इन मंत्रीजी की कार्यशैली को लेकर हाईकोर्ट भी तीखी टिप्पणी कर चुका है। खबर है कि जल्दी ही सीएम इन्हें बुलाकर संभलने की हिदायत दे सकते हैं।

वित्त विभाग का अड़ियल रूख
मप्र वित्त विभाग की कार्यशैली से आजकल अन्य विभाग के अधिकारी बहुत परेशान हैं। जब भी कोई विभाग फंड की मांग के लिये दबाव बनाता है तो वित्त विभाग के एक आला अधिकारी ऊपर तक शिकायत करते हैं कि खरीदी और ठेके के नाम पर भ्रष्टाचार करने फंड मांगा जा रहा है। वित्त विभाग के इस शक्की स्वभाव के कारण ही तिलहन संघ के कर्मचारियों के वेतन भत्तों का मामला भी लंबे समय से अटका पड़ा है। इस मामले में हाईकोर्ट में अवमानना के 25 प्रकरण दर्ज हो चुके हैं। सरकार वकीलों पर लाखों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन वित्त विभाग कर्मचारियों को उनके जायज अधिकार नहीं दे रहा है।

कांग्रेस में जूतम पैजार!
कांग्रेस में गुटबाजी कोई नई बात नहीं है। लेकिन अभी तक किसी जिला अध्यक्ष को अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व केन्द्रीय मंत्री के खिलाफ पत्रकार वार्ता करते पहली बार देखा गया। झाबुआ के जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेश पटेल ने पार्टी के सबसे बड़े आदिवासी चेहरे और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया पर 600 करोड़ के घोटाले में शामिल होने के न केवल आरोप लगाए हैं बल्कि भूरिया को मानसिक रूप से दिवालिया भी बता दिया है। खबर है कि अब भूरिया, महेश पटेल और अलीराजपुर के कारण विधायक मुकेश पटेल को कांग्रेस से बेदखल कराने में जुट गए हैं। कांग्रेस के अंदरखाने से खबर है कि कमलनाथ के भोपाल लौटते ही महेश पटेल को नोटिस दिया जाएगा और उन्हें कांग्रेस से बाहर भी किया जा सकता है। लेकिन मुकेश पटेल को बचाया जा सकता है।

और अंत में….
मप्र की राजधानी भोपाल में ईसाई मिशनरी का बड़ा केंद्र बनने की खबरें आ रही हैं। चर्चा है कि ईसाई मिशनरी ने सूखी सेवनिया के पास अमोनी गांव में सवा सौ एकड़ जमीन खरीदी है। इस जमीन पर फिलहाल आवासीय स्कूल शुरू किया गया है। यहां पढ़ाने के लिए अधिकांश शिक्षक एवं अन्य स्टॉफ झारखंड से लाया गया है। झारखंड के यह लोग मूलत: आदिवासी हैं जिन्हे ईसाई बनाया गया है। ईसाई मिशनरी पर धर्मांतरण के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में भोपाल में बन रहे इस बड़े केंद्र पर राज्य सरकार की नजर पड़ गई है।

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