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पांच हजार साल पुराना है दक्षिण का ‘द्वारका’, छिपा है ये खास रहस्य | Five Thousand Years Old Lord Sri Krishna Town in Dwarka of South…

Posted on: 08 Jun 2019 10:59 by Surbhi Bhawsar
पांच हजार साल पुराना है दक्षिण का ‘द्वारका’, छिपा है ये खास रहस्य | Five Thousand Years Old Lord Sri Krishna Town in Dwarka of South…

केरल: एक बार फिर देश की सत्ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को केरल पहुंचे है। यहां वह त्रिसूर जिले के प्रसिद्ध गुरुवायूर मंदिर में पूजा-अर्चना की और ‘तुलाभरम’ की रस्म भी पूरी की। भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद लेने के बाद मोदी एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। हालांकि आज हम आपको गुरुवायूर मंदिर के बारे में कुछ खास बातें बताने जा रहे है।

दक्षिण भारत का द्वारका

केरल के इस प्रसिद्द गुरुवायूर मंदिर में भगवान गुरुवायुरुप्पन की पूजा होती है। भगवान गुरुवायुरुप्पन को भगवान विष्णु का रूप माना माना जाता है। यही कारण के कि इस मंदिर को गुरुवायूर श्रीकृष्ण मंदिर भी कहा जाता। साथ ही इसे दक्षिण भारत का द्वारका भी कहा जाता है।

हजारों साल पुराना

दक्षिण भारत का द्वारका कहा जाने वाला गुरुवायूर मंदिर पांच हजार साल पुराना है। मंदिर में रहने वाले पुजारी को मेंसाती कहते हैं, जो कि 24 घंटे भगवान की सेवा में रहते हैं।

ऐसा है ड्रेस कोड

मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का एक खास ड्रेस कोड होता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को मुंडु नाम की पोशाक पहननी होती है, जबकि बच्चों को वेष्टी पहनाई जाती है। महिलाओं को सलवार-सूट या साड़ी में ही एंट्री दी जाती है।

हिंदू ही कर सकते है प्रवेश

इस मंदिर की सबसे खास बात ये है कि यहां केवल हिंदू धर्म के लोग ही प्रवेश कर सकते है। दूसरे किसी भी धर्म के लोगों को मंदिर परिसर में जाने पर साख्त प्रतिबंध है।

अनाकोट्टा का विशेष महत्व

भगवान गुरुवायुरुप्पन के दर्शन करने के बद्द श्रद्धालुओं को अनाकोट्टा नामक स्थान पर भी जाना पड़ता है। यह स्थान हाथियों के लिए लोकप्रिय है। गुरुवायूर मंदिर से जुड़े हाथियों को यहां 10 एकड़ जगह में रखा जाता है। यहां लगभग 80 हाथियों के रहने की व्यवस्था की गई है।

तुलाभरम रस्म

श्रीकृष्ण के इस मंदिर में तुलाभरम नाम की खास रस्म निभाई जाती है। इस रस्म में यक्ति को तराजू में फूल, अनाज, फल जैसी वस्‍तुओं के साथ तौला जाता है और उतनी ही वस्‍तुएं दान की जाती हैं। यहां भगवान को खासतौर से कमल के फूल चढ़ाए जाते है।

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