केंद्र ने मप्र के हिस्से की राशि में 14,233 करोड़ की कटौती की

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भोपाल। वित्त मंत्री तरुण भनोत ने कहा है कि केंद्र सरकार ने पुनरीक्षित बजट अनुमान में मध्यप्रदेश को मिलने वाली राशि में 14,233 करोड़ रुपए की कटौती की है। वर्ष 2019 की फरवरी में जारी बजट अनुमान और वर्ष 2020 के पुनरीक्षित अनुमान के दोनों दस्तावेजों से यह स्पष्ट हो जाता है कि मध्यप्रदेश के हिस्से की राशि में भारी कटौती केंद्र सरकार ने की है। भनोत ने कहा कि यही नहीं केंद्रीय योजनाओं में राज्यों की हिस्सेदारी यूपीए सरकार के समय 25 प्रतिशत थी, जिसे वर्तमान एनडीए सरकार ने बढ़ाकर 40 और कुछ योजनाओं में 50 प्रतिशत तक कर दिया था। इस प्रकार राज्य के अंशदान में 60 से 100 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई। इससे मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्य सरकार भी वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं।

भनोत ने कहा कि केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री जयंत सिन्हा इस मामले में गलत बयानी और गुमराह करने वाले बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिन्हा अपनी ही सरकार के पिछले और इस वर्ष के बजट अनुमान का अध्ययन कर लेते तो शायद वे यह असत्य कथन नहीं करते। वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने फरवरी 2019 में जारी बजट अनुमान में मध्यप्रदेश को 63,750.81 करोड़ राशि आवंटित की थी। वर्ष 2020 के फरवरी माह में पुनरीक्षित अनुमान में यह राशि घटाकर 49,517.61 करोड़ कर दी गई। जो कि 14,233 करोड़ रुपए कम है।

भनोत ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कभी भी ऐसी बात नहीं की जो तथ्यों पर आधारित न हो। वे राजनीतिक बयान-बाजी नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के हितों के साथ निरंतर केंद्र सरकार जो अन्याय कर रही है उस पर वे तथ्यों और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात कह रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र में भाजपा नीत सरकार आने के बाद निरंतर राज्यों के साथ अन्याय हो रहा है। 2014 के पहले यूपीए सरकार के समय जब डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब केंद्र की विभिन्न योजनाओं में केंद्र का अंश 75 प्रतिशत और राज्यों की 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी होती थी, लेकिन जबसे केंद्र में मोदी सरकार आयी है, तब से केंद्रीय योजनाओं में राज्यों की हिस्सेदारी में 60 से 100 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि पिछले 50 वर्षों में केंद्र सरकार से राज्यों को उनके हिस्से की मिलने वाली राशि सबसे कम आंकी गई है। भनोत ने कहा कि श्री सिन्हा जाने माने वित्तीय जानकार होने के साथ ही विद्वान भी है। उनसे अपेक्षा नहीं थीं कि वे बगैर अध्ययन और तथ्यों के आर्थिक मुद्दों पर गलत बयानी करें।