सबसे चुनौतीपूर्ण पहाड़ पर चढ़े Indore के CA, 14 हजार 600 फीट ऊंचे पीक पर लहराया तिरंगा

इंदौर। कहते है कि शौक बड़ी चीज है और अपने शौक को जीना उससे भी बड़ा है। अगर आप भी ट्रेकिंग और क्लाइम्बिंग के शौकीन है तो रजत नाहर (CS Rajat Nahar) आपको इंस्पायर कर सकते है। पेशे से रजत सीए (CS Rajat Nahar) है और और सिटी बैंक में काम करते हैं। रजत मध्य प्रदेश के इंदौर से है उन्होंने हाल ही में चुनौतीपूर्ण पहाड़ों में शामिल हिमालयन पीक चौरीखांग (Himalayan Peak Chaurikhang) पर तिरंगा फहरा कर लौटे हैं। रजत पेशे से सीए हैं। आपको बता दें कि, रजत ने14 हज़ार 600 फीट ऊंचे इस पीक को फंतह किया।

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रजत इस ट्रैक पर अलग-अलग राज्यों के 54 पर्वतारोही के साथ गए थे। यह पर्वत सिक्किम (Sikkim) में स्थित है और यह पीक और दार्जीलिंग का हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टिट्यूट (Himalayan Mountaineering Institute) अपने स्टूडेंट्स को यहां ट्रेनिंग देता है। रजत (CS Rajat Nahar) ने भी एक महीने की यह ट्रेनिंग ली है। यहां से लौटने के बाद रजत ने इस पूरे ट्रैक के बारे बताया। उन्होंने कहा कि पहाड़ों की चढ़ाई में सबसे मुश्किल होता है और इससे भी मुश्किल होता है खुद के साथ पीठ पर 20 किलो वज़न भी लाद कर चढ़ना। बर्फ में वैसे ही पैर धंसते हैं, फिर वज़न, हाड़ कंपाने वाली ठंड, ऑक्सीजन की कमी भी एक चुनौती ही होती है।

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रजत ने बताया कि, कई लोग अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते। बारिश न हो तब भी रेन सूट पहनना पड़ता है वरना ऊनी कपड़े भीग गए तो हालत ख़राब हो जाएगी। आपको बता दें कि, पर्वतारोहण के जूते भी अलग किस्म के होते हैं जो बर्फ और बारिश दोनों को झेलने की क्षमता रखते है। रजत ने आगे बताया कि, हमारे टूर में ट्रेक भी लंबे लंबे थे और हमने -7 डिग्री में इन्हें पूरा किया है। दार्जीलिंग से हम योकसम गए और फिर यहां से चौरीखांग बेस कैम्प पहुंचे। यहां तक पहुंचने में हमे चार दिन लग गए थे और कुल 8-9 दिन में हम चोटी के शिखर पर पहुंचे और वहां तिरंगा फहराया।