नई दिल्ली : योग हमें शारीरिक और मानसिक स्वस्थ रहने में मदद करता है। कुछ लोग योग को इसलिए नहीं करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि योग बहुत ही मुश्किल है या वो नहीं कर पाएंगे। शुरवात में कठिन आसन या गलत आसन करने से आनेवाली दिक्कतों की वजह से योग करना छोड़ देते है।
अगर आप योग करने की शुरवात करने जा रहे है तो तो आपको कुछ आसान योगासन से शुरवात करना चाहिए। योग हमारे शरीर को अंदर और बाहर दोनों तरफ से स्वस्थ रखता है।योग हमारे शरीर को अंदर और बाहर दोनों तरफ से स्वस्थ रखता है।
आज हम योग शुरू करने वालों के लिए कुछ योगमुद्राएँ और उससे मिलने वाले फायदे बताएँगे।

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1. अधोमुखश्वानासन योग

सबसे पहले सीधे खड़े हों और दोनों पैरों के बिच छोड़ा दूरी रखें।
उसके बाद धीरे से नीचे की ओर मुड़ें जिससे की V जैसे Shape बनेगा।
जैसे की ऊपर दिए हुए फोटो में आप देख रहे हैं दोनों हाथों और पैरों के बीच में थोडा सा दूसरी बनायें।
साँस लेते समय अपने पैरों की उँगलियों की मदद से अपने कमर को पीछे की ओर खींचें। अपने पैरों और हांथों को ना मोड़ें।
ऐसा करने से आपके शरीर के पीछे, हांथों और पैरों को अच्छा खिंचाव मिलेगे।
एक लम्बी से साँस लें और कुछ देरी के लिए इस योग पोज़ में रुकें।

अधोमुखश्वानासन योग के फायदे

1.मांसपेशियों में मजबूती आती है।
2.साइनस की समस्या दूर होती है।
3.शरीर को अच्छा खिचाव मिलता है।
4.रक्त परिसंचरण में सुधार आता है।

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2. ताड़ासन योग
सबसे पहले अपने पैरों के मदद से सीधे खड़े हों।अपने दोनों पैरों के बीच थोडा सा जगह बनायें।उसके बाद एक लम्बी साँस के साथ अपने पैरों की उँगलियों की मदद से शरीर को थोडा ऊपर उठायें और अपने दोनों हांथों को धीरे-धीरे उपर उठायें। उसके बाद अपने एक हाँथ की उँगलियों से दूसरी हाँथ के उँगलियों को जोड़ें।कम से कम 15-30 सेकंड इस मुद्रा में रहें और अपने शरीर को ऊपर की और खींचें।
उसके बाद धीरे-धीरे अपने हांथों को सामान्य स्तिथि में ले आयें।

ताड़ासन योग के फायदे

1.यह आसन उन लोगों के ज्यादा फायदेमंद साबित होता है जो अपना 2.लम्बाई बढ़ाना चाहते हैं।
3.मुद्रा में सुधार होता है।
4.रीढ़ की समस्याओं से दूर रखता है।

3. सुखासन योग
सबसे पहले फर्श पर एक दरी बिछाएं और दोनों पैरों को मोड़ कर बैठ जाएँ।
पैर कुछ इस तरीके से मोड़ कर बैठे कि एक पैर का नीचला हिस्सा बाहर की और दिखे और दूसरा अगले पैर के जांघों के नीचे।उसके बाद सीधे बैठें और अपने रीड की हड्डी को सीधा रखें।अपने दोनों हांथों के हथेलियों को ऊपर करके अपने घुटनों पर रखें और ज्ञान मुद्रा धारण करें।
धीरे-धीरे लम्बी साँस लें और धीरे-धीरे फिर साँस छोड़ें।

सुखासन योग के फायदे
1.रीड की हड्डी में खिचाव होता है जो रीड की हड्डी को लम्बा होने में मदद करता है।
2.छाती का चौड़ाई बढ़ता है।
3.मन को शांति मिलती है।
चिंता, तनाव और मानसिक थकान से जुड़े रोग दूर होता हैं।

4. शवासन योग
यह बहुत ही आसान योग मुद्रा है परन्तु इससे शरीर को बहुत महत्वपूर्ण लाभ होते हैं।सबसे पहले एक समतल जगह पर एक दरी बीचा लें।उसके बाद ऊपर की और मुहँ करके लेट जाएँ।अपने दोनों पैरों को एक दूरे से अलग रखें।उसके बाद कुछ मिनटों के लिए धीरे-धीरे साँस लें और छोड़ें।

शवासन योग के फायदे
1.इससे शरीर को आराम मिलता है।
2.ध्यान / एकाग्रता में सुधार लता है।

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5. वीरभद्रासन योग
सबसे पहले सीधे खड़े हों।दोनों पैरों के बिच 3-4 फीट की दूरी रखें।
लम्बी साँस लें और दोनों हांथों को जमीन के समान्तर में ऊपर उठायें और अपने सर को दाएँ तरफ मोड़ें।उसके बाद साँस छोड़ते हुए अपने दाएँ पैर को 90 डिग्री में मोड़ें और हल्का सा दाएँ तरफ मोड़ें।पैर को मोड़ने के तरीके को समझने के लिए फोटो को देखें।

वीरभद्रासन योग की फायदे
1.इस योग मुद्रा से पैरों और भुजाओं को शक्ति मिलती है।
2.नीचले भाग के शरीर को भी स्वस्थ रखता है।

6. वृक्षासन योग
सबसे पहले अपने दोनों हांथों को बगल में रख कर सीधे खड़े हों।उसके बाद ध्यान से अपने दाएने पैर को अपने बाएँ पैर के जांघ पर रखकर सीधे खड़े रहें। समझने के लिए फोटो को देखें।उसके बाद धीरे-धीरे डॉन हांथों को जोड़ कर ऊपर की ओर ले जाएँ और प्रार्थना मुद्रा धारण करें।
कम से कम 30-45 सेकंड तक इस मुद्रा में बैलेंस करने की कोशिश करें।

वृक्षासन योग के फायदे
1.संतुलन में सुधार आना।
2.जांघों, पैर और रीड की हड्डी को मजबूत बनाने के लिए।

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7. सेतुबंधासन योग
इस योग मुद्रा में आपको अपने शरीर को एक पुल के जैसे बनाना पड़ता है।
सबसे पहले जमीन पर सीधे लेट जाएँ और अपने बाहं को दोनों तरफ रखें।
जिस प्रकार चित्र में दिया गया है देखकर अपने शरीर के नीचले हिस्से को उठायें। उस मुद्रा में एक लम्बी सी साँस लें और लगभग 25-30 सेकंड तक रुकें।उसके बाद धीरे-धीरे अपने शरीर को नीचे ला कर प्रथम मुद्रा पर लायें।
इस योगासन को 4-5 बार दोहराएँ।

सेतुबंधासन योग के फायदे
1.छाती को मजबूती देता है।
2.साथ ही पीछे और रीड की हड्डी भी तंदरुस्त होता है।
3.मन की चिंता दूर होती है।

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8. त्रिकोणासन योग
सबसे पहले सीधे खड़े हों और अपने दोनों पैरों के बिच थोडा गैप रखें।
उसके बाद अपने दाएँ पैर को 90 डिग्री में मोड़ें।उसके बाद थोडा सा शरीर को भी दाएँ तरफ झुकाते हुए अपने दाएँ हाँथ से अपने दाएँ पैर के उँगलियों को छुएं और बाएं हांथ को ऊपर की और सिधाई में रखें जैसा फोटो में दिया गया है।इस मुद्रा में 1-2 मिनट तक रुकें।
त्रिकोणासन योग के फायदे
1.पुरे शरीर को अच्छा खिचाव मिलता है।
2.रक्त परिसंचरण / सर्कुलेशन में सुधार होता है।
3.गुर्दा / किडनी स्वस्थ रहता है।

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9. अर्धमत्स्येन्द्रासन योग
सबसे पहले नीचे सीधे बैठ जाएँ।उसके बाद अपने बाएँ पैर को मोड़ें और अपने पीछे दाएं तरफ को छूने की कोशिश करें। समझने के लिए फोटो को देखें।उसके बाद अपने दाएँ पैर को अपने बाएँ पैर के अगले तरफ ले जाकर रखें। दायाँ पैर अगली तरफ जमीन को छूना चाहिए।उसके बाद अपने शरीर को पैर मोडे हुए तरफ के विपरीत दिशा में तानें या खींचे और अगली तरफ पैर को पीछे से छूने की कोशिश करें।इस मुद्रा में 20-30 सेकंड के लिए रुकें। उसके बाद अगली दिशा में भी इस योगासन को दोहराएँ।

अर्धमत्स्येन्द्रासन योग के फायदे
मांशपेशियों को अच्छा खिचाव मिलता है।रीड की हड्डी में मजबूती आती है।रक्त परिसंचरण सही तरीके से होता है।कब्ज़ और अपचन से शरीर को बचाता है।

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10. भुजंगासन योग
सबसे पहले पेट नीचे की तरफ कर के लेट जाएँ।
उसके बाद एक लम्बी साँस के साथ अपने शरीर के उपरी भाग को जैसे सर, गर्दन, कन्धों और छाती को ऊपर की तरफ ले जाएँ जैसे चित्र में दिया गया है।

भुजंगासन योग के फायदे
1.पेट में एसिडिटी और गैस की प्रॉब्लम दूर करता है।
2.मोटापा कम होता है।
3.रक्त परिसंचरण सही तरीके से होता है।
4.अपच और कब्ज की शिकायत दूर करता है।

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11. बद्ध कोणासन योग
सबसे पहले नीचे जमीं पर एक दरी बिछाएं और सीधे बैठ जाएँ।
उसके बाद अपने दोनों पैरों के नीचे हिस्से हो सामने पास ला कर जोड़ें।
उसके बाद दोनों पैरों के जुड़े हुए स्थान के नीचे पकड़ने की कोशिश करें जैसे चित्र में है।उसके बाद अपने पैरों को तितली की पंख के तरह हिलाएं।
आप तेज़ी से भी इस आसन को कर सकते हैं।

बद्ध कोणासन योग के फायदे
1.पेट के अंगों को तंदरुस्त रखता है।
2.साथ ही किडनी को भी स्वस्थ रखता है।

 

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12. बालासन योग 

सबसे पहले अपने पैरों को पीछे की और कर के मोड़ लें जैसे चित्र में किया गया है और अपने दोनों हांथों को अपने जांघों में रख कर सीधे बैठें।
उसके बाद धीरे-धीरे साँस छोड़ते हुए अपने छाती को घुटनों से जोड़ें।
उसके बाद अपने हांथों को आगे की तरफ सीधे भी आप रख सकते हैं और पीछे भी रख सकते हैं।उसके बाद ध्यान से धीरे-धीरे साँस लें और और उस मुद्रा में 2-3 मिनट तक रुकें।इस योग को 5-10 बार दोहोराये।

बालासन योग के फायदे

१. मानसिक चिंतन दूर होता है।
२. कमर का दर्द दूर होता है।

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