हाथ में मौली या कलावा बांधने से पहले ये खबर जरुर पढ़ ले

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हमारे हिंदू धर्म में पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान या फिर कोई भी मांगलिक कार्य हो तों हाथ की कलाई पर लाल धागा यानी कलावा बांधने की परंपरा है. कलावा को दूसरे शब्द में मौली या रक्षासूत्र भी कहा जाता है.

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जब भी कोई से शुभ कार्य की शुरुआत की जाती है तो उस समय या नई वस्तु खरीदने पर हम उसे कलावा/मौली बांधते हैं ताकि वह हमारे जीवन में शुभता प्रदान करे। कलावा/मौली कच्चे सूत के धागे से बनाई जाती है. यह लाल, पीले, या दो रंगों या पांच रंगों की होती है. शास्त्रों के अनुसार कलावा बांधने की परंपरा की शुरुआत देवी लक्ष्मी और राजा बलि ने की थी. माना जाता है कि कलाई पर इसे बांधने से आने वाले संकट से रक्षा होती है.

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इसके अलावा वैज्ञानिक दृष्टि से मौली के कई फायदे है. यह स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद है। शरीर विज्ञान के अनुसार शरीर के कई प्रमुख अंगों तक पहुंचने वाली नसें कलाई से होकर गुजरती हैं. कलावा बांधने से इन नसों की क्रिया नियंत्रित रहती है. इससे त्रिदोष यानी वात, पित्त और कफ का सामंजस्य बना रहता है. इसका मतलब है कि कलाई में मौली बांधने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है.

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इसके साथ ही कलावा बांधने से अगर कोई सी बीमारी है तो वह भी नहीं बढ़ती है. पुराने जमाने में घर परिवार के लोगों में देखा गया है कि हाथ, कमर, गले और पैर के अंगूठे में कलावा या मौली का प्रयोग करते थे. जो कि स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी था. माना जाता है कि कलावा बांधने से रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह और लकवा जैसे गंभीर रोगों से काफी हद तक बचाव होता है.

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