वामा साहित्य मंच ने मनाया ‘सितंबर एक-रंग अनेक’ कार्यक्रम

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सितंबर माह के हर तीज, पर्व, त्योहार, दिवस और विशेष अवसर को वामा साहित्य मंच ने अपने अनोखे अंदाज में बनाया। इस माह में शिक्षक दिवस, हरतालिका तीज, कजली तीज, साक्षरता दिवस, जन्माष्टमी, हिन्दी दिवस, गणेश चतुर्थी, पर्यटन दिवस, पर्युषण, श्राद्ध पक्ष आते हैं। अत: किसी एक विषय के बजाय यह सुनिश्चित किया गया कि खुशियों भरे इस माह को कुछ खास अंदाज में मनाएं। प्रयास किया गया कि हर सदस्य अपनी सुविधा के हिसाब से इन पर्वों और दिवस में से कोई एक विषय का चयन कर मनपसंद विधा में अपनी प्रस्तुति दें। आयोजन में प्रयास किया गया कि हर सदस्य को अपनी बात कहने का पर्याप्त अवसर मिले।

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‘दिवस और पर्वों की सुरीली आहट में मेरी अभिव्यक्ति’ थीम पर हर सदस्य अपने मनपसंद विषय और पर्व पर विभिन्न विधाओं में बोलीं।  किसी ने लघुकथा सुनाई, तो किसी ने गीतों की रसधारा बहाई, किसी ने ओजस्वी विचारों से समां बांधा किसी ने पत्र का वाचन किया। किसी ने कहानी पढ़ी, तो किसी ने कविता गढ़ीं कोई सदस्य व्यंग्य के जरिए अपनी बात कहने में कामयाब रहीं तो किसी ने अपने संस्मरण से बात शुरु की। कुल मिलाकर विषय भी विविध थे और विधा भी अलग-अलग.. इस सतरंगी-नवरंगी वातावरण में उद्देश्य सिर्फ इतना था कि सितंबर माह के कोई तीज-त्योहार दिवस रह न जाए….लगभग 40 सदस्यों ने अपनी अभिव्यक्ति दी। रश्मि लोणकर ने श्राद्ध पक्ष पर कविता पढ़ीं कि तर्पण कर पानी का तृप्त वह होते हैं, आशीषों का अंबार प्रदान करते हैं।

मधु टांक ने हिंदी दिवस पर आलेख इन शब्दों के साथ आरम्भ किया कि हिंदी हमारी ऊंची उड़ान है, सबकी आन, बान, शान है, दिलों में रस घोल दे, ऐसी मीठी जुबान है। हंसा मेहता ने पर्युषण पर कविता पढ़ीं, आया पर्व पर्युषण, प्रेम शांति का संदेश लेकर…निशा विलास देशपांडे ने गणेशोत्सव पर रचना प्रस्तुत की-हे गौरी नंदन गणेश गजानन, चरणों में यह प्रार्थना, अंतर्मन से करूं तेरी आराधना…भावना दामले ने लिखा-हमारे स्वाभिमान की भाषा हिंदी है, हमारे अभिमान की भाषा हिंदी है…विनीता चौहान ने अपने ओजस्वी अंदाज़ में कविता पढ़ीं-मेरी हिंदी भाषा पर संकट छा रहा है, पश्चिमी अंधानुकरण जब से भारत आ रहा है। बकुला पारेख ने हरतालिका तीज पर लघुकथा का वाचन किया, रश्मि प्रणय वागले ने भी लघुकथा प्रस्तुत की, वहीं मृणालिनी घुले ने शिक्षक दिवस पर नाजुक सी कविता लिखी-शतदल सी कलाएं जिसमें, शिक्षक वह फूल कमल का, स्मृति आदित्य ने अपने विद्यार्थियों के नाम पत्र पढ़ा। वैजयंती दाते,अध्यक्ष पद्मा राजेन्द्र और सचिव ज्योति जैन की रचनाओं ने खूब ताली बटोरी।

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वामा साहित्य मंच की सचिव ज्योति जैन ने बताया कि हर मास होने वाली मीटिंग में तीन सदस्यीय टीम बना दी जाती है जिन पर आयोजन का पूरा दायित्व होता है। इस बार आयोजन का नेतृत्व किया निधि जैन ने, जिन्होंने कार्यक्रम का सुमधुर संचालन किया। उनकी टीम में रुपाली पाटनी और शोभा प्रजापति सहयोगी थीं।

सरस्वती वंदना शोभा प्रजापति ने प्रस्तुत की। आभार माना रुपाली पाटनी ने।।