कल है कजरी तीज का पर्व, इस व्रत से मिलता है ऐसा आशीर्वाद

यह हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद या भादो मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती हैं। आमतौर पर कजरी तीज हरियाली तीज के करीब 15 दिनों के बाद मनाई जाती है और यह रक्षाबंधन यानी की श्रावण पूर्णिमा के तीन दिन बाद आती है।

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हिन्दू मान्यताओं के अनुसार कजरी तीज का महत्व बहुत ज्यादा माना गया हैं। इस साल कजरी तीज 18 अगस्त रविवार को मनाई जाएगी। यह हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद या भादो मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती हैं। आमतौर पर कजरी तीज हरियाली तीज के करीब 15 दिनों के बाद मनाई जाती है और यह रक्षाबंधन यानी की श्रावण पूर्णिमा के तीन दिन बाद आती है।

हिन्दू धर्म में खास चार प्रकार की तीज होती है, जिसमें अखा तीज, हरियाली तीज, कजरी और हरतालिका तीज शामिल है। खास तौर पर तीज उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश, पंजाब में खास महत्व के साथ मनाई जाती है।

कजरी तीज के दिन महिलाएं अपने पति कि मंगलकामना की मनोकामना मन में करते हुए निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं, जिससे उनको अखंड सुहाग का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आमतौर पर विवाहित स्त्रियां ही इस व्रत को करती हैं, लेकिन कुंवारी कन्याएं मनचाहे वर की कामना से इस व्रत को कर सकती हैं।

इस दिन महिलाएं पूरा श्रृंगार करती हैं, नए कपड़े पहनती हैं और हाथों में मेंहदी रचाती हैं। पूजा के दौरान वे माता पार्वती को सुहाग की समाग्री अर्पित करती हैं। माना जाता हैं कि इस तरह के व्रतों में शादीशुदा महिलाओं को सुहागन का पूरा श्रृंगार करना चाहिए। इससे सुहाग की सलामती और उसकी लंबी उम्र का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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