स्वतंत्रता, समानता, न्याय एवं बंधुत्व के प्रतीक थे महान नेता मार्टिन लूथर किंग | The great leader Martin Luther King was a symbol of freedom, equality, justice and fraternity

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नीरज राठौर की कलम से

दुनियाभर में आज यानी 4 अप्रैल को महान नेता मार्टिन लूथर किंग को उनकी आज हुई शहादत दिवस पर याद किया जा रहा है. साठ के दशक में अमेरिका में अश्वेतों के लिए सफल सिविल राइट आंदोलन चलाने वाले मार्टिन लूथर किंग जूनियर की आज ही के दिन 1968 में महज़ 39 साल की उम्र में तब हत्या हो गयी थी, जब वो अपने ख़ास दोस्तों के साथ आंदोलन की रूपरेखा बनाने के लिए मेमफ़ेसिस शहर के एक होटल में रुके थे.

ये विश्वास करना कठिन है कि दुनिया का सबसे ताकतवर और धनी देश अमेरिका महज 55 साल पहले गोरे और काले लोगों के बीच खड़ी नफरत की दीवार को तोड़ने के लिए संघर्ष कर रहा था. अश्वतों की गुलामी खत्म करने के लिए छिड़े सिविल वॉर के बावजूद अश्वेतों को समान नागरिक अधिकार हासिल करने के लिए खून बहाना पड़ रहा था. अश्वेत लोगों की मुक्ति की इस लड़ाई को आवाज दे रहे थे मार्टिन लूथर किंग जूनियर.

अमेरिका के गांधी डा.मार्टिन लूथर किंग जूनियर (Martin Luther King Jr.) का जन्म सन 1929 में अमेरिका के अटलांटा शहर में हुआ था | किंग ने संयुक्त राज्य अमेरिका ने नीग्रो समुदाय के प्रति होने वाले भेदभाव के विरुद्ध सफल अहिंसात्मक आन्दोलन का संचालन किया | वर्ष 1955 का वर्ष उनके जीवन का निर्णायक मोड़ था | इसी वर्ष कोरेटा से उनका विवाह हुआ था , उनको अमेरिका के दक्षिणी प्रान्त अल्बामा के मोंटमोगरी शहर में डेक्सटर एवेन्यु बैप्टिस्ट चर्च में प्रवचन देने के लिए बुलाया गया और इसी वर्ष मोंटमोगरी की सार्वजनिक बसों में काले-गोर के भेद के विरुद्ध एक महिला श्रीमती रोज पार्क्स की गिरफ्तारी की | इसके बाद ही किंग ने प्रसिद्ध बस आन्दोलन चलाया |

पुरे 381 दिनों तक चले इस सत्याग्रह आन्दोलन के बाद अमेरिकी बसों में काले-गोरे यात्रियों के लिए अलग अलग सीटे रखने का प्रावधान खत्म कर दिया | बाद में धार्मिक नेताओ की मदद से समान नागरिक कानून आन्दोलन अमेरिका के उत्तरी भाग में फैला | उन्हें सन 1964 में विश्व शान्ति के लिए नोबेल पुरुस्कार से नवाजा गया | कई अमेरिकी विश्वविद्यालयो ने उन्हें मानद उपाधियाँ प्रदान की है | धार्मिक और सामाजिक संस्थाओ ने उन्हें कई मैडल प्रदान किये | TIME पत्रिका ने उन्हें 1963 का Man of the Year चुना था | वे गांधीजी के अहिंसक आन्दोलन से बेहद प्रभावित रहे | गांधीजी की आदर्शो पर चलकर ही किंग (Martin Luther King Jr.) ने अमेरिका में इतना सफल आन्दोलन चलाया , जिसे अधिकांश गोरो का समर्थन मिला |

1963 में अफ्रीकी अमेरिकी समुदाय के हकों की मांग को लेकर वाशिंगटन सिविल राइट्स मार्च किया गया. इस मार्च के दौरान 28 अगस्त 1963 ने मार्टिन लूथर किंग ने उन अब्राहम लिंकन मेमोरियल की सीढ़ियों पर खड़े होकर एक भाषण दिया था, जिन्होंने देश में गुलामी प्रथा खत्म की थी. इस महान भाषण को ‘I Have a Dream’ भाषण के नाम से जाना जाता है. यह अमेरिकी सिविल राइट्स आंदोलन का सुनहरा अध्याय है. इस भाषण और मार्च के चलते किंग उस साल टाइम्स पर्सन ऑफ द इयर बने. 1964 में वो सबसे छोटी उम्र में नोबेल प्राइज़ जीतने वाले नेता बने. मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने महात्मा गांधी से प्रेरित होकर सिविल राइट आंदोलन छेड़ा था.

डॉ॰ किंग की प्रिय पंक्ति थी –“हम वह नहीं हैं, जो हमें होना चाहिए और हम वह नहीं हैं, जो होने वाले हैं, लेकिन खुदा का शुक्र है कि हम वह भी नहीं हैं, जो हम थे।”

आज ही के दिन 4 अप्रैल 1968 को उन्हे अमेरिका के एक होटेल मे गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई।
मार्टिन लूथर होटल में अपने कमरे की बालकनी में खड़े थे, उसी दौरान अचानक आई एक गोली ने उनकी जान ले ली. मार्टिन लूथर किंग को मारी गयी गोली किसने चलाई, इस षड्यंत्र के पीछे कौन लोग थे, यह आज भी एक पहेली है. उनके शहादत दिवस पर इस लेख के माध्यम से उनके आंदोलन, विचार और योगदान की संक्षिप्त पड़ताल करने की कोशिश की गयी है.

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