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एक हरे भरे तीन सौ साल पुराने आम के पेड़ की नृशंस हत्या ?

Posted on: 04 Jan 2019 12:19 by Ravindra Singh Rana
एक हरे भरे तीन सौ साल पुराने आम के पेड़ की नृशंस हत्या ?

डा० राम श्रीवास्तव
([email protected])

जगह- किसी ज़माने में होलकर राज के महाराजा तुकोजीराव होलकर के शाही महल लाल बाग़ का एक भाग । आज़ादी के बाद इस जगह पर डाइट अर्थात डिस्ट्रिक्ट इन्स्टीट्यूट आफ एजुकेशन ट्रेनिंग की संस्थान बनाई गई । शुरू में शिक्षा को खेती से जोड़ने के उद्देश्य से शिक्षकों को खेती बाड़ी से जोड़कर रखने के निमित्त २३ एकड़ की जगह पर यह संस्था बना दी गई । मंध्यभारत टूटकर मध्यप्रदेश बनते ही मास्टरों को खेती बाड़ी के ज्ञान से मुक्त करके बेसिक ट्रेनिंग दी जाने लगी । संस्था से लगे खेतों को ठेके पर दिया जाने लगा । ख़ाली पड़ी ज़मीन पर म०प्र० हाऊसिंग बोर्ड की नज़र पड़ी ।

kesar bagh indore

उसने सरकार से यह ज़मीन हथियाकर आधी ज़मीन अधिकॉश टीचर्स को अलॉट करने के नाम पर ओने पौने दामों में कई निजी लोगों को हस्तांतरित कर दी । शेष बची ज़मीन पर ख़ुद ने एच आई जी, एम आई जी और एल आई जी के क्वार्टर बनाकर दुगने दामों मे १७.५ % व्याज पर हायर परचेज पर बैंच दिये । बीचों बीच नाले के उत्तर में लगभग तीन अकड़ बहुमूल्य जगह को रीक्रियेशन सेन्टर बनाने हेतु आरक्षित किया गया ॥ पर भू माफ़िया की नज़र से इन्दौर नगर में स्थित यहॉ की वेशकीमती जगह भला कैसे बच सकती है । कुछ लोगों ने इस करोड़ों की ज़मीन को चुपचाप अपने नाम जादू मन्तर से हस्तरांतरित करा लिया । चारों तरफ़ ऊँची दीवारें खिच गई इस ज़मीन पर दर्जनों पेड थे , धीरे धीरे सब ग़ायब होने लगे ।

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इन पेड़ों का खास महत्व भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम से जुडा है। यहीं पर अंग्रेज़ रेजीडेन्सी ने १८५७ में पकड़े गए आज़ादी के सिपाहियों को पुराने पीपल के पेड की डालियों से फ़ॉसी पर लटकाया था । इस जगह को भूमि माफ़िया ने जैसे ही हड़पा इन पेड़ों की जान खतरें में आगई ।बजरंगबली के मंदिर के सामने जिस हरे भरे विशालकाय आम के पेड में जहॉ इस गर्मी मे स्वादिष्ट अमियॉ झूम रहीं थी , उसके गर्त में गड्डा खोदकर खडा नमक भरकर पानी भर दिया गया, ऊपर से मिट्टी डाल कर सीमेन्ट की बोरी आदि से ढक दिया गया । फिर जगह जगह ड्रिल करके कुछ गहरे छेड़ और दरारें बनाकर उनमें नमक का घोल तीन चार दिन में नियमित पिलाया जाने लगा ।

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देखते ही देखते पेड के पत्तों ने क्लोरोफ़िल बनाना बन्द कर दिया । आहार नहीं मिलने के कारण पेड भूख से मरने लगा ॥ उसकी मोटी मोटी टहनियों सूखने लगी …और पेड घुट घुट कर मरने लगा । किसी भी बड़े बृक्ष को बिना ज़िला अधिकारी की अनुमति कोई भी व्यक्ति न तो काट सकता है न ही नष्ट कर सकता है । बृक्ष को नष्ट करना क़ानूनी अपराध है ।….पर पेड तो पेड है… बह सूखता जा रहा है । कल तक जो हरा भरा फलदार था , आज एक एक करके उसकी टनों वज़न की शाखाएँ सूख कर नष्ट हो रही हैं ।…..भू माफ़िया व्दारा जीवित पेड की नृशंस हत्या हो रही है । बेज़ुबान पेड चीख़ कर कह भी नहीं पारहा है …”देखो हत्यारा मुझे जान से मार रहा है …अरे कोई तो आकर मेरी रक्षा करो “ !

 

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