आज के बढ़ती महंगाई और बेतहाशा बेरोजगारी के इस दौर में नौकरी के माध्यम से अपना जीवन यापन करना ही बेहद कठिन हो रहा है, तो फिर अपने सपनों को पूरा करने की तो गुंजाइश ही बाकी नहीं बचती है। महीना ख़त्म होने से कहीं पहले ही नौकरी से मिली हुई सैलेरी साथ छोड़कर जा चुकी होती है, जिसकी वजह से महीने के आखिरी दिनों में अच्छी खासी दिक्क्तों का सामना सभी वेतन भोगियों को करना पढ़ता है।

यह समस्या मुख्यतः प्रायवेट सेक्टर के छोटे और मध्यम वर्ग के कर्मचारियों को सर्वाधिक फेस करना पड़ती है, जबकि प्रायवेट सेक्टर्स के शीर्ष अधिकारी और सरकारी नौकरी के लगभग सभी वर्ग के कर्मचारी इन समस्याओं से सबसे कम दुष्प्रभावित होते हैं। आज के दौर में अपनी जरूरतों के साथ ही अपने सपनों को भी पूरा करना है तो व्यापार से बेहतर कोई क्षेत्र नहीं है, जिसमें जोखिम तो होता है, मगर प्रॉफिट की सर्वाधिक संभावना भी इसी क्षेत्र में पाई जाती है।

आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे बिजनेस आइडिया की जिसमें आप कम पूंजी में बड़ी कमाई करके अपनी जरूरतों के साथ ही अपने सपनो को भी पूरा कर सकते हैं। आज हम यहां बात कर रहे हैं.

हम यहां बात कर रहे हैं. तगड़े मुनाफे की अगर आप भी तगड़े मुनाफे की कमाने वाली खेती करना चाहते हैं तो मखाने की खेती (How to do Makhana Farming) कर सकते हैं. इसकी खेती में आपको बंपर लाभ हो सकता है. यह एक ऐसा उत्पाद है, जिसे, सर्दी, गर्मी बारिश हर मौसम में खाया जाता है. इसके अतिरिक्त बच्चों से लेकर बूढ़े तक सभी बड़े उत्साह से खाते हैं. इतना ही नहीं इस उत्पाद की मांग गांव से शहरों तक अक्सर शानदार बनी रहती है. वहीं, इसकी खेती से किसानों की कमाई भी कई गुना तक बढ़ जाती है. मखाने की खेती देश में सबसे ज्यादा बिहार के कुछ जिलों में होती है. बिहार में नीतीश सरकार ने किसानों की कमाई बढ़ाने के मोटिव से मखाने की विकास योजना की पहल की है. इस योजना के अंतर्गत किसानों को 72,750 रुपये की सब्सिडी उपलब्ध कराई जाती है.

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कैसे होती है मखाने की खेती

मखाने की खेती दो प्रकार से की जा सकती है. पहला तरीका है तालाब में खेती करना और दूसरा तरीका है खेतों में. इसकी खेती में दो फसलें ली जा सकती हैं. पहला है मार्च में लगाना और फिर अगस्त सितंबर में हार्वेस्टिंग. वहीं दूसरी फसल सितंबर अक्टूबर में लगती है, जिसकी हार्वेस्टिंग फरवरी मार्च में हो जातीहै. पहले इसकी नर्सरी बनाई जाती है और फिर उसे कम से कम डेढ़ से दो फुट पानी वाले खेत या फिर तालाब में लगााया जाता है. इसकी फसल करीबन 6 माह में तैयार हो जाती है.

कितनी होगी कमाई

लेकिन मखाने में मुनाफे की जानकारी के मुताबिक मगर किसान मखाने की खेती आधुनिक टेकनीक से चल रहा हैवहीं इसकी खेती में 1 लाख रुपये की लागत आती है. वहीं अगर कमाई की बात करें तो इससे कम से कम 1 से डेढ लाख रूपये एक मौसम में मिलते हैं. जबकि साल में मखाना दो बार बोया जाता है.

सरकार से मिलेगी सब्सिडी

इस पर किसानों को अधिकतम 72,750 रुपये की सब्सिडी दी जाती है. सब्सिडी पाने के लिए इन 8 जिलों के किसान बिहार सरकार के लिए अप्लाई कर सकते हैं.