मानेसर-गुड़गांव इलाके में मंदी से क्यों बन रहे हैं बदतर हालात

50 हजार ऐसे श्रमिक हैं जो हरियाणा से यहां काम करते हैं। मानेसर और गुड़गांव में 60 लाख दोपहिया वाहनों का निर्माण होता है।

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अर्जुन राठौर

मानेसर और गुड़गांव का इलाका ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का हब माना जाता है लेकिन यहां के जो हालात हैं वह बेहद बदतर हो रहे हैं। जो रिपोर्ट सामने आई है उसके अनुसार अप्रैल से लेकर अभी तक यहां 40,000 से अधिक ठेका श्रमिकों की नौकरी जा चुकी है।

यहां पर दो लाख ऐसे श्रमिक हैं जो बिहार उड़ीसा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से आए हैं। इसके अलावा 50 हजार ऐसे श्रमिक हैं जो हरियाणा से यहां काम करते हैं। मानेसर और गुड़गांव में 60 लाख दोपहिया वाहनों का निर्माण होता है। इस अर्थ में कहा जाए तो यह पूरे देश के दोपहिया बाजार का 29% होता है लेकिन अब यहां हालात बिगड़ते चले जा रहे हैं। देश की 35 फ़ीसदी कारें भी यही बनती है याने हर साल 16 लाख नई कारें यहां पर निर्माण की जाती है लेकिन अब 36% उत्पादन कम होने के कारण हालात बिगड़ते चले जा रहे हैं।

मारुति सुज़ुकी के 350 वेंडरों द्वारा उत्पादन में 25% की कमी की गई है और हालत यह है कि 15 कल पुर्जा निर्माता और छोटे वेंडर अपनी काम की पारी कम करते चले जा रहे हैं वहां तीन पारी में काम होता था लेकिन अब सिर्फ एक पारी में ही काम होता है।

मारुति खुद ने अपना उत्पादन 30 से 35% घटा दिया है और अस्थाई श्रमिकों की संख्या में 40% की कमी कर दी है। निश्चित रूप से आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है।

ट्रकों के कारोबार की स्थिति भी बहुत बदतर है मानेसर में ट्रक कारोबारी बताते हैं कि यहां ना तो अब ट्रक है और ना ट्रक चालक ज्यादातर चालक काम पर आये ही नहीं है और वे गांव लौट गए ट्रक के कारोबार में 75 से 80% की कमी आ गई क्योंकि कल पुर्जों संयंत्रों से आपूर्ति बहुत घट गई है।

बड़े कंटेनर ट्रक चलाने वाले बताते हैं कि यहां पर काम मिल ही नहीं रहा है और अब उनके गांव जाने की नौबत आ रही है। कुल मिलाकर मानेसर गुड़गांव इंडस्ट्रियल एरिया अब धीरे-धीरे वीरानी की ओर बढ़ रहा है। छोटी कंपनियों की हालत सबसे ज्यादा खराब हो गई है इन पर मंदी का सबसे ज्यादा असर हुआ है और यही वजह है कि 30000 से ज्यादा लोगों की नौकरियां भी जा चुकी है।

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