संघर्षों से भरी रही है राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की जिंदगी, एक के बाद एक खोया पूरा परिवार लेकिन नहीं मानी हार

अपने जीवन में कई तरह के संघर्षों का सामना करने के बाद द्रौपदी मुर्मू ने राजनीति में उच्च पद हासिल किया है.

Draupadi Murmu: देश को 15वें राष्ट्रपति के रूप में पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) मिल गई हैं. बता दें कि मुर्मू के इस पद तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं रहा. बता देंगे यहां तक पहुंचने तक द्रौपदी को अपने जीवन में कई सारे उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा.

बता देंगे जब द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) शादी करके अपने ससुराल पहुंची थी तब उनका घर कच्चा था. घास-फूस का छप्पर बनाया गया था. यह सब तो ठीक था लेकिन द्रौपदी ने बहुत करीब से अपनों को बिछड़ते हुए देखा है. साल 2010 से 2014 तक इन 4 सालों में द्रौपदी ने अपने दो बेटे और पति को खोया है. उनके बड़े बेटे की मौत कैसे हुई इस रहस्य से आज भी पर्दा नहीं उठा है.

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द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) के बड़े बेटे का नाम लक्ष्मण मुर्मू था. बस 25 वर्ष की उम्र में उनकी मौत हो गई थी. एक शाम को वह देर से घर लौटे और फिर सुबह उठे ही नहीं, उन्हें क्या हुआ यह बात कोई नहीं जानता. इसके बाद उनके छोटे बेटे बिरंचि मुर्मू की 25 वर्ष की उम्र में रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई. अक्टूबर 2014 में उनके पति ने भी हमेशा के लिए उन्हें अलविदा कह दिया.

द्रौपदी (Draupadi Murmu) को सबसे बड़ा दुख तो अपनी शादी के कुछ समय बाद ही झेलना पड़ा था. जब उनकी पहली संतान ने 3 वर्ष की उम्र में उन्हें छोड़कर दुनिया को अलविदा कह दिया था. यह घटना 1984 में हुई थी. द्रौपदी मुर्मू की पहली संतान एक बच्ची थी. जीवन में इतने दुख झेलने के बाद द्रौपदी डिप्रेशन का शिकार भी हुई लेकिन उन्होंने ध्यान केंद्रित कर खुद को इन सभी चीजों से बाहर निकाला और कभी भी हार नहीं मानी.