नितिनमोहन शर्मा

एमपी अजब है-गजब है। अब ये बात गौमाता के मामले में सामने आई है। गाय के नाम पर सत्ता में आने वाली भाजपा की शिवराज सरकार के पास प्रदेश की ग़य्या मैय्या के लिए 20 रुपये भी नही लेकिन वह पड़ोस राज्य राजस्थान की गोशाला को 50 रुपये देने जा रही है। यहां की गोशालाएं ओर गोसेवक 22 महीने से 20 रुपये अनुदान की बाट जोह रहे है, सरकार इससे बेफिक्र राजस्थान की गोशाला से 50 रुपये प्रति गाय के हिसाब से अनुबंध कर रही। ये काम उस गोसंवर्धन बोर्ड ने किया जिसके जिम्मे प्रदेश की गोशालाओं ओर गौमाताओं की देखरेख ओर कायाकल्प का काम है।

बोर्ड ने ये अनुबंध गुपचुप बाले बाले कर लिया। उधर दो साल से अटके अनुदान, गोशालाओं की दुर्दशा ओर लम्पि वायरस के कहर से दम तोड़ती गौमाताओं के दर्द का खुलासा फर्स्ट के खुलासे के बाद सरकार में हलचल की जानकारी सामने आई है। सूत्र बताते है कि इस मूददे पर प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने अफ़सोस जताते हुए पूरे मामले को अपनी में निगरानी में लिया है। अब प्रदेश के गोशाला प्रतिनिधि जल्दी ही मिश्रा की चौखट पर दस्तक देंगे।

मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार के पास गौमाता के जीवनयापन के लिए 20 रुपये भी नही। लेकिन उसने राजस्थान की एक गौशाला से 50 रुपये प्रति गाय रखरखाव के हिसाब से एमओयू साइन कर लिया। वह भी तब जबकि प्रदेश में गौ सेवा करने वाली अनेक संस्था ओर सेकड़ो की संख्या में गौसेवक है।मठ मंदिर और आश्रम वाले भी इस कार्य मे मदद को तैयार थे।

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लेकिन इनमे से किसी को कोई जानकारी नही दी गई और राजस्थान की एक मशहूर गोशाला को 50 रुपये प्रति गाय के हिसाब से ठेका दे दिया। न कोई सरकारी सूचना। न कोई विज्ञप्ति। ठेके पर बाले बाले देने का काम किया सरकार के अधीन काम करने वाले गौसंवर्धन बोर्ड ने। बोर्ड के जिम्मे गौमाताओं का संरक्षण, संवर्द्धन का काम है लेकिन बोर्ड केवल राजनीतिक लाभ लेने तक सिमट गया है। प्रदेश की गोशालाओं के बुरे हाल है और बोर्ड प्रदेश की बाहर की गोशालाओं से अनुबंध कर रहा है। जबकि उसके जिम्मे प्रदेश की गोशालाओं के कायाकल्प का काम है।

बोर्ड को इस बात की चिंता भी नही की सरकार गोशालाओं का 22 महीने का अनुदान रोककर बैठी है। बोर्ड की जिम्मेदारी अनुदान दिलवाने की है लेकिन वह राजस्थान की पथमेड़ा गोशाला को प्रदेश की सबसे बड़ी गोशाला सौप रही है। ये गौशाला आगर मालवा जिले में है जिसे राजस्थान के हवाले करने का एमओयू साइन किया गया है। उधर खुलासा फर्स्ट के गोमाता की दुर्दशा के खुलासे के बाद सरकार में हलचल हुई है। मामला दिल्ली तक गया है। सूत्र बताते है कि इस मूददे पर प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने नाराजगी भी प्रकट की है। अब गोशालाओं के प्रतिनिधि इस मूददे पर मिश्रा से उम्मीद लगाए हुए है।

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शिवराज सरकार गोशालाओं का अनुदान नही दे रही है। 22 महीने का अनुदान रुका हुआ हे। अनुदान के अभाव में गौशालाओं का संचालन मुश्किल हो चला है। वही गोमाताए भी दम तोड़ रही है। लम्पि वायरस के कहर ने गोशालाओं के हाल बेहाल कर रखे है लेकिन प्रदेश के गोसंवर्धन बोर्ड को इसकी चिंता नही। वो संकट के इस दौर में भी “लाभ हानि” तलाश रहा है। बोर्ड अपनी गोशालाओं की व्यवस्था चुस्त दुरुस्त करने की बजाय पड़ोसी राज्य राजस्थान की गोशालाओं से अनुबंध कर प्रदेश की गोशालाओं को उनके हवाले कर रहा है।

वह भी प्रदेश में तय रेट से ढाई गुना ज्यादा कीमत पर। कोई पूछने वाला नही कि वो ऐसा क्यो कर रहा है जबकि प्रदेश में गोशालाओं को संभालने वाले हजारों गोसेवक व सेकड़ो संस्थाओ के अलावा मठ मन्दिर आश्रम भी ये काम कर सकते है। खुलासा के पास पुख्ता जानकारी आई है कि मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले में सांलरिया गो अभ्यारण को लेकर बोर्ड ने ये खेल खेला है। ये अभ्यारण्य ( गौशाला) 1400 एकड़ जमीन में बना हुआ है। इसमे वर्तमान में 3200 से ज्यादा गोमाता निवास करती है। यहां की व्यवस्था अभी तक प्रदेश सरकार के अधिकार में थी।

लेकिन गोसंवर्धन बोर्ड के मुखिया अखिलेश्वरानंद महाराज ने इस गोशाला को राजस्थान की मशहूर पथमेड़ा गौशाला ट्रस्ट को सोप दिया। वह भी 50 रुपये प्रतिदिन प्रति गाय के हिसाब से। जबकि यहां बोर्ड सरकार से 20 रुपये भी दिलवा नही पा रहा है। गोसेवा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 50 रुपये के हिसाब एमआईयू साइन हो गए हैं। प्रदेश की धरती पर 1400 एकड़ बनकर तैयार हुये गो अभ्यारण के लिए प्रदेश में गौ सेवको की कोई कमी नहीं है। आज भी लाखों गौ माता की सेवाएं बड़ी-बड़ी संस्थायें कर रही है। मठ मन्दिर ओर आश्रमो में भी संत महात्माओं के द्वारा अनेक बड़ी-बडी गोशालाये संचालित हो रही।

गो सेवा भारती का कहना है कि यह हमारा दुर्भाग्य कि मध्यप्रदेश सरकार ने बिना कोई विज्ञप्ति, समाचार पत्र किसी भी प्रकार की सार्वजनिक जानकारी को नही देते हुए राजस्थान के पँथमेड गौशाला ट्रस्ट को अभ्यारण ₹50 प्रतिदिन प्रतिमान से दे दिया है। हमें यह दुख है कि मध्यप्रदेश में गौशालाओं को ₹20 प्रतिदिन के मान से देने में सरकार ने 22 महीने की राशि रोक कर बैठी और दूसरे प्रदेश के ट्रस्ट को इस प्रकार ₹50 की राशि देकर प्रदेश की जनता के साथ और गौ सेवकों के साथ धोखा किया जा रहा है। वह भी चोरी चुपके।