ऐसी उम्मीद तो नहीं थी कमलनाथ जी

0
108
kamalnath

राजेश राठौर

किसी भी अफसर का तबादला होना ना तो खबर है और ना हीं कोई आश्चर्य लेकिन जब कुछ तबादले ऐसे होते हैं जिनको लेकर सवाल उठने लगते हैं, तो फिर बात आगे बढ़ती है। इन दिनों छोटे से जिले महाकाल के कारण प्रसिद्ध उज्जैन के कलेक्टर का तबादला चर्चा का विषय बना हुआ है। वहां के कलेक्टर मनीष सिंह के काम करने की स्टाइल कुछ अलग है। वह कोई नया काम नहीं करते लेकिन जो काम है उसी को कुछ अलग अंदाज में करने की महारत उनको हासिल है। मनीष सिंह के बारे में सब जानते हैं। जब दिग्विजय सिंह सरकार थी तो एडीएम इंदौर हुआ करते थे। तब कांग्रेस सरकार के कहने पर लक्ष्मणसिंह गौड़ जैसे कई भाजपाइयों की लाठियों से पिटाई उन्होंने खुद की थी। जब बाद में भाजपा सरकार बनी तो हर कोई कहने लगा इनका निपटना तय है। उसके बाद मनीष सिंह कृषि उपज मंडी पहुंचे वहां पर मक्कार कर्मचारियों को ठिकाने लगाया। टैक्स चोरी कम की। उसके बाद विकास प्राधिकरण में पहुंचे तो वहां पर योजनाओं की जमीनों के खेल को उजागर किया। भोपाल में उन्होंने नगर निगम कमिश्नर रहते हुए जो काम किया उसको आज भी वहां के लोग याद रखते हैं। उसके बाद जब इंदौर लौटकर आए तो यहां पर वह काम कर दिया जिसकी कल्पना किसी नेता, मुख्यमंत्री, विधायक, महापौर या आम जनता को भी नहीं थी। सफाई अभियान को लेकर 24 घंटे यदि काम किया है तो मनीष सिंह ने। नगर निगम के मक्कार कर्मचारियों को ठिकाने लगा दिया जो आए दिन हड़ताल करने की धमकी देते थे, एक परिवार के 10 लोग नौकरी करते थे। कई लोग बिना काम करें वेतन लेते थे। जब कमिश्नर खुद सुबह 5 बजे हो या रात की 1 बजे मैदान में हो तो फिर अमला कैसे मैदान में नहीं आता। देखते ही देखते कचरा पेटियां कब उठ गई पता नहीं चला। कैसे लोगों के घर तक कचरा गाड़ियां पहुंचने लगी। घर-घर से कचरा इकट्ठा होने लगा। जो 60 साल से ट्रेंचिंग ग्राउंड पर ढेर बना हुआ था उस कचरे का निपटारा कैसे उन्होंने तेजी से शुरू किया, जहां बगीचा बनाने की तैयारी है। मनीष सिंह ने इंदौर को एक बार नहीं दो बार लगातार सफाई में नंबर वन लाकर यह बता दिया कि अफसर चाहे तो सब कुछ हो सकता है। हालांकि यह बात सही है कि मेयर से लेकर सभी जनप्रतिनिधियों ने उन पर पूरा भरोसा किया। उस भरोसो को मनीष सिंह ने तोड़ा नहीं। जिस तरीके से सफाई अभियान के कारण लोगों से मनीष सिंह को तारीफ मिलने लगी उससे भी कई नेताओं को परेशानी होने लगी थी।

kamalnath

खासतौर से जब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में इंदौर की तंग गलियों को चौड़ी सड़कों के रूप में बदलने के लिए जो तोड़फोड़ हुई उसके कारण मनीष सिंह सबसे ज्यादा विवादों में रहे। इंदौर को आवारा पशुओं से ही नहीं आवारा सूअर से भी मुक्त किया। जिस शहर में गिनती के सुविधा घर थे वहां पर 300 से ज्यादा सुविधा घर कुछ महीनों में ही बना दिए। ऐसे कई काम है। आज मनीष सिंह की तारीफ करके हम यह नहीं कहना चाहते कि उनका तबादला करके गलत किया लेकिन जब उज्जैन पहुंचे तो वहां पर महाकाल मंदिर में धर्म के ठेकेदारों ने जो दुकानदारी कर रखी थी उसको ठीक करने का काम किया। यही कारण था कि पहले जो रसीद के माध्यम से महाकाल मंदिर ट्रस्ट को पैसा मिलता था वह मनीष सिंह ने कुछ ही समय में 20 गुना ज्यादा कर दिया। इसका मतलब साफ है कि कथित पांडे और पुजारियों का लेन-देन बंद कर दिया।

manish singh

महाकाल मंदिर के विकास के लिए ढाई सौ करोड़ से ज्यादा के काम के टेंडर कर दिये। उसके बाद मंदिर परिसर के आसपास के अवैध कब्जे हटा दिए। तभी भाजपा और कांग्रेस के नेताओं उनसे नाराज थे। इंदौर के खजराना मंदिर की बात हो या रणजीत हनुमान की या बिजासन मंदिर की यदि वहां कोई काम किया है तो वह एकमात्र मनीष सिंह ने। आमतौर पर धर्म प्रेमी कहे जाने वाले मनीष सिंह के बारे में यह सुनकर लोगों को धक्का पहुंचा कि उज्जैन में शनिश्चरी अमावस्या के दिन पानी का इंतजाम नहीं करना और उससे बड़ी बात दो मंत्रियों के फोन नहीं उठाने के कारण उनको हटा दिया। मुख्यमंत्री कमलनाथ वाकई सख्त प्रशासक की भूमिका में नजर आ रहे हैं। इससे कोई इनकार नहीं कर सकता। कांग्रेस की छवि से अलग हटकर कमलनाथ यदि वल्लभ भवन में बैठकर अनुशासन में शासन को ला रहे हैं तो यह बड़ी बात है। अचानक इस मुद्दे पर क्या हुआ? इन नेताओं के आगे या कहें मंत्रियों के आगे कमलनाथ को समझौता करना पड़ा। यह बात भी सही है कि मंत्रियों का फोन उठाना चाहिए था लेकिन मनीष सिंह को क्या पता कि यह किसका नंबर है। उनका तबादला हो गया। अब कुछ नहीं होगा लेकिन आगे ऐसे अफसरों का उपयोग कमलनाथ को करना ही पड़ेगा। औद्योगिक केंद्र विकास निगम में रहकर भी मनीष सिंह ने बड़े-बड़े उद्योगपतियों से पीथमपुर में जमीन छीनकर दूसरे लोगों को आवंटित कर दी थी। उधोगपति इंडस्ट्री नहीं लगा रहे थे। ऐसे कई काम मनीष सिंह की खाता बही में मिल जाएंगे। आमतौर पर प्रचार से दूर रहने वाले मनीष सिंह के लिए सोशल मीडिया में कल से धूम मची हुई है। हर कोई उनके तबादले को गलत बता रहा है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अफसरों पर कार्रवाई नहीं होना और सीधे कलेक्टर, कमिश्नर का तबादला कर देना यह बात लोगों को गले नहीं उतर रही। खैर नई सरकार है हम तो यही कहेंगे ‘माफ करो सरकार, काम करो सरकार’ क्योंकि कमलनाथ की पहचान काम करने वाले नेता की है। उम्मीद की जाना चाहिए कि अब सरकार इस तरह के फैसले शायद नहीं लेगी।

वरिष्ठ पत्रकार

Read More: मप्र में विधान परिषद् का गठन होगा: दिग्विजय सिंह

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here