पुरानी पेंशन योजना को लागू करने के लिए झारखंड सरकार कर रही प्रयास, मुख्य सचिव के सुझावों पर करेंगे अमल

पुरानी पेंशन योजना को लागू करने के लिए संबंधित संलेख में किसी प्रकार के बदलाव के लिए भी कैबिनेट की अनुमति अनिवार्य है। ऐसे में प्रस्ताव कैबिनेट के पास भेजना भी जरूरी होगा।

कर्मचारियों के द्वारा पुरानी पेंशन को लागू करने की मांग लगातार की जा रही है। तो वहीं कर्मचारियों की मांग पूरी करने को लेकर झारखंड सरकार भी लगातार कोशिश कर रही है। दरअसल पुरानी पेंशन योजना से संबंधित एक प्रस्ताव फिर से तैयार किया जाएगा। पूर्व में भी ऐसा ही प्रस्ताव तैयार किया था लेकिन तारीखों में हुई गड़बड़ियों की वजह से अब फिर पुरानी पेंशन योजना से संबंधित प्रस्ताव एक बार फिर कैबिनेट की सहमति के लिए तैयार किया जाएगा। क्योंकि पूर्व में तैयार किए गए प्रस्ताव में निर्धारित तिथि तक कर्मियों की सहमति प्राप्त कर लेने का उल्लेख किया गया था लेकिन कैबिनेट की अनुशंसा उक्त तारीख के बाद प्राप्त हुई।

जानकारी के अनुसार अन्य विभागों के पास से इस प्रस्ताव को कैबिनेट तक पंहुचने में बहुत विलंभ हुआ और कैबिनेट की बैठक में इसको 15 जुलाई को अनुमति दी गई। इस प्रस्ताव में 30 जून तक कर्मियों की सहमति प्राप्त कर लेने का उल्लेख था। लेकिन विलंभ के चलते इसे 15 जुलाई को अनुमति मिल पाई।

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बताया जा रहा है कि प्रस्ताव में हुई गड़बड़ियों को दूर करने के लिए बाद ही संचिका आगे बढ़ पाएगी। इस हेतु मुख्य सचिव के द्वारा मुख्य बिंदुओं पर सुझाव दिए गए जिनपर अमल कर के पुरानी पेंशन योजना को लागू किया जा सकता है। इसके लिए वित्त विभाग को भी सुझाव दिए गया है कि भविष्य की तमाम संभावित अड़चनों को दूर करके आगे की ओर बढ़े और इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि इस संदर्भ में एसओपी बनाने के लिए संयुक्त विकास आयुक्त की अध्यक्षता में 3 सदस्य समिति का गठन भी करना है, लेकिन इसको लेकर भी कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।