गुजरात : क्यों पढ़ाई जा रही है स्कूलों में ‘गीता’, हाई कोर्ट पहुंचा जमीयत उलेमा-ए-हिन्द

गुजरात सरकार द्वारा राज्य में 6 वीं से लेकर 12 वीं कक्षा तक के पाठ्यक्रम में श्रीमद्भागवत गीता के सार स्वरूप को सम्मिलित करने की घोषणा। विरोध में जमीयत उलेमा ए हिंद की ओर से गुजरात हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका लगाई गई है। धर्म विशेष से जोड़कर देख रहे हैं याचिकाकर्ता

गुजरात (Gujrat) सरकार द्वारा राज्य में 6 वीं से लेकर 12 वीं कक्षा तक के पाठ्यक्रम में श्रीमद्भागवत गीता के सार स्वरूप को सम्मिलित करने की घोषणा अभी कुछ दिन पूर्व ही की गई है। श्रीमद्भागवत गीता के आदर्शों, शिक्षाओं और प्रेरणाओं को नई पीढ़ी से अवगत कराने का उद्धेश्य गुजरात सरकार द्वारा बताया गया। परन्तु गुजरात सरकार की इस घोषणा के विरुद्ध मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा ए हिंद की ओर से गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) में एक जनहित याचिका लगाई गई है।

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धर्म विशेष से जोड़कर देख रहे हैं याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ता जमीयत उलेमा ए हिंद ने इसे राष्ट्रिय शिक्षा नीति के विरुद्ध बताया है और साथ ही इसे धर्म विशेष से जोड़कर संविधान का हवाला भी दिया गया है। गुजरात सरकार द्वारा राज्य में 6 वीं से लेकर 12 वीं कक्षा तक के पाठ्यक्रम में श्रीमद्भागवत गीता के सार स्वरूप को सम्मिलित करने की घोषणा के बाद से ही इसके विरोध में स्वर उठने लगे थे ,परन्तु गुजरात हाईकोर्ट में याचिका लगाकर इस घोषणा का आधिकारिक खंडन उक्त याचिकाकर्ता संगठन ने किया है।

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पाठ्यक्रम में इस स्वरूप में मिलेंगी गीता की शिक्षाएं

गुजरात सरकार के अनुसार श्रीमद्भागवत गीता की शिक्षाओं को कक्षा 6 वीं से लेकर 12 वीं के पाठ्यक्रम की पाठ्यपुस्तक में सम्मिलित किया गया है। इसके साथ ही गीता पर आधारित ज्ञान स्पर्धाएं, गीता के श्लोकों का गान व विश्लेषण और गीता पर आधारित साहित्य लेखन-पठन कार्यक्रम के आयोजन इस योजना के अंतर्गत सम्मिलित हैं।