पाई-पाई को मोहताज महान संगीतकार वनराज भाटिया

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मुंबई। जिनके लिखे गानों से महफिलें सजा करती थीं, वो अब इतने तनहा हो गए हैं कि कोई गलती से भी घर आ जाए, तो फफक पड़ते हैं। न दवाई के पैसे हैं, न चलने-फिरने की ताकत है और न ही कोई दर्द सुनने वाला है।ये दास्तान है महान संगीतकार वनराज भाटिया (92) की। ‘जाने भी दो यारों’, ‘मंथन’, ‘अंकुर’, ‘जुनून’ और ‘भूमिका’ के हिट गाने लिखने वाले भाटिया ने बताया कि पाई-पाई के लिए मोहताज हूं। बैंक अकाउंट में एक रुपया भी नहीं है। व्हील चेयर से उठ कर चल भी नहीं पाता हूं। अखबार वाले इंटरव्यू के लिए पहुंचे, तो हाथ पकड़ कर रोने लगे। बोले कि आप ही आए हो। अब तो कोई देखने भी नहीं आता। घर का सामान बेचना चाहता हूं, ताकि खाना-पानी और इलाज की व्यवस्था हो सके। सुना है, कुछ दोस्त मदद करने वाले हैं, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है। भाटिया की चर्चा भी तब शुरू हुई है, जब कुछ दिन पहले उनकी पालतू बिल्ली को कार ने कुचल दिया।

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