गद्दार पर Ghamasan : दिग्विजय सिंह पर आरोपों की झड़ी लगा दी भाजपा ने, कांग्रेस ने कहा ‘दुसरा जन्म लेना होगा’

आपको बता दे कि हाल ही में कांग्रेस पार्टी के महासचिव और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के राजघराने पर आरोप लगाया था कि उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मी बाई के साथ गद्दारी की थी।

मार्च 2020 से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया(Jyotiraditya Scindia) पर खुद गद्दारी का आरोप लगाने वाली भाजपा, अब उन्हें कांग्रेस द्वारा लगाये जा रहें, गद्दार वाले आरोपों से बचाती फिर रहीं हैं। आपको बता दे कि हाल ही में कांग्रेस पार्टी के महासचिव और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह(Digvijay Singh, General Secretary of Congress Party and former Chief Minister of Madhya Pradesh) ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के राजघराने पर आरोप लगाया था कि उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मी बाई के साथ गद्दारी(traitor) की थी।

और इसी कड़ी में अब भाजपा भी दिग्विजय सिंह के पिता पर एक पत्र के हवाले से यह आरोप लगा रहीं है कि उनके पिता भी अंग्रेजों के मुरीद थें और उनके खिलाफ कभी कुछ नहीं बोलते थे। भाजपा का दावा हैं कि यह पत्र दिग्विजय सिंह के पिता बलभद्र सिंह ने अंग्रेजों को 16 सितम्बर 1939 को लिखा था।

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भारतीय जनता पार्टी की ओर से ये आरोप पंकज चतुर्वेदी और दुर्गेश केसवानी ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके लगाए। इस दौरान भाजपा ने कई गंभीर आरोप भी लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंकज चतुर्वेदी और दुर्गेश केसवानी ने दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि आप गद्दारों के परिवार से आते हैं जो अंग्रेजों के चाटुकार थे। अगर आप जवाब दे सकते हैं तो जवाब दीजिये जनता आपके जवाबों का इन्तजार करेगीं।

भाजपा ने बिंदुवार आरोप लगाते हुए कहा कि जब देशभक्त क्रांतिकारी अंग्रेजों की गोलियां खा रहे थे, तब दिग्विजय सिंह के पिता बलभद्र सिंह, अपने वंशजों द्वारा अंग्रेजों की सेवा की दुहाई देकर अपने और अपने परिवार के लिए सुरक्षा और सुविधाओं की मांग करते रहे। भाजपा का कहना हैं कि बलभद्र सिंह ने 16 सितंबर 1939 को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने अंग्रेजों की चाटुकारिता की थी। और तथाकथित यही पत्र 2002 में दिग्विजय सिंह के शासन काल के दौरान भोपाल में पुरातत्व विभाग की प्रदर्शनी में रख दिया गया था।

भाजपा ने इतिहासकार राजा रघुवीर सिंह जी के हवाले से कहा कि दिग्विजय के पूर्वजों को मुगलों की वफादारी के बदले में ही राघोगढ़ दिया गया। क्योकि पानीपत की तीसरी लड़ाई में राघोगढ़ के तत्कालीन राजा ने मराठा सेनापति का साथ न देकर विदेशी आक्रमणकारी मुगलों का साथ दिया था।
भाजपा ने कहा कि जब प्रदर्शनी में रखे इस पत्र पर चर्चा शुरू हुई तो तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इस पर गुस्सा गए और तुरंत यह पत्र प्रदर्शनी से हटवा दिया। लेकिन तब तक राघोगढ़ राजघराने का अंग्रेज साम्राज्य से प्रेम जनता देख चुकी थीं।

भाजपा द्वारा दिग्विजय सिंह पर लगाए गए आरोपों पर कांग्रेस ने भी पलटवार किया हैं। कांग्रेस की ओर से उनके प्रवक्ता KK MISHRA ने दिग्विजय सिंह पर आरोप लगाने वाले पंकज चतुर्वेदी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इन्होने अभी अभी भाजपा JOIN की है, इसलिए ये इनकी मजबूरी हैं और इन्हे साबित भी तो करना हैं कि ये राजनीती जानते है या नहीं। मिश्रा ने कहा कि पंकज चतुर्वेदी अभी दिग्विजय सिंह से कद में बहुत छोटे हैं उन्हें सिंह पर आरोप लगाने के लिए दुसरा जन्म लेना पड़ेगा।