MP News: उज्जैन में छाया शिवनवरात्रि का उल्लास, भक्त हो रहे निहाल

उज्जैन: उज्जैन स्थित भूत भावन भगवान महाकालेश्वर के मंदिर में शिवनवरात्रि का उल्लास छाया हुआ है तो वहीं भक्त भी बाबा महाकाल के अनूठे श्रृंगार के दर्शन लाभ लेकर निहाल हो रहे है।

उज्जैन: उज्जैन स्थित भूत भावन भगवान महाकालेश्वर के मंदिर में शिवनवरात्रि का उल्लास छाया हुआ है तो वहीं भक्त भी बाबा महाकाल के अनूठे श्रृंगार के दर्शन लाभ लेकर निहाल हो रहे है। बता दें कि उज्जैन और महाकाल मंदिर ही एक ऐसा स्थान है जहां महाशिवरात्रि के अवसर पर नौ दिनों तक शिवनवरात्रि का उत्सव मनाया जाता है।

इसकी शुरूआत  हो चुकी है और पूरे नौ दिनों तक राजाधिराज महाकाल के विविध श्रृंगार किए जाएंगे। गौरतलब है कि 1 मार्च को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी तथा इस दिन सुबह से ही महाकाल निरंकारी स्वरूप में श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे।

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उज्जैन शक्तिपीठ और तीर्थ है –

उज्जैन शक्तिपीठ और शक्तितीर्थ है। उज्जैन का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। उज्जैन में ही बाबा महाकाल के साथ ही सम्राट विक्रमादित्य की आराध्य देवी हरसिद्धि भी विराजमान होकर अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते है।

प्राचीन परंपरा है यह –

उज्जैन के इतिहास और पुराणों के जानकारों का कहना है कि जिस तरह से देवी की आराधना का पर्व नवरात्रि मनाया जाता है उसी तरह से उज्जैन में शिवनवरात्रि मनाने की परंपरा प्राचीन समय से ही चली आ रही है। शिव साधना के लिए शिवनवरात्रि का विधान बताया गया है। हालांकि अब महाकाल के अलावा भी अन्य कई शिव मंदिरों में शिवनवरात्रि मनाने की शुरूआत हो गई है, लेकिन उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में यह परंपरा प्राचीन है।

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आराधना सर्वोत्तम फलदायक –

विद्वानों का कहना है कि कृष्ण पक्ष के दौरान चंद्रमा की कलाएं क्षीण मानी जाती है और इसका असर मनुष्य के मन पर पड़ता है अर्थात मन का कारक चंद्रमा होने से मानसिक पीड़ा रहती है लेकिन शिवनवरात्रि के दौरान महादे की पूजा अर्चना व आराधना करने से निश्चित ही  सर्वोत्तम फल मिलता है।

पंचग्रही योग में महाशिवरात्रि –

ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि इस बार की महाशिवरात्रि मंगलवार 1 मार्च को मनेगी और यह पर्व पंचग्रही योग में होगा। इस योग में भगवान भोलेनाथ की पूजन अर्चन करने से उनका आशीर्वाद व कृपा प्राप्त होगी।

कब शुरू होगी महाशिवरात्रि –

महाशिवरात्रि 1 मार्च की तड़के 3.16 मिनट से शुरू होकर अगले दिन बुधवार की सुबह 10 बजे तक रहेगी जबकि पूजा के लिए शुभ समय शाम 6.22 से रात 12.33 तक बताया गया है।