घाटी में हाहाकार: आग लगने पर कुआं खोद रही सरकार

ऐसे में परिवारों की बडी चिंता अब इस बात की है कि उनके घर, जमीन सबकुछ डूब चुके हैं। उनका भविष्य क्या होगा। सरकारी अफसर भी उन्हें यहां लावारिस छोड गए हैं।

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बड़वानी। सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई लगातार बढ़ाए जाने से बैक वाटर इलाके में बसे तमाम गांवों में हाहाकार मचा हुआ है। गाँव और घर जलमग्न हो चुके हैं। लोगों को ना जमीन मिली है ना मुआवजा। पानी भर जाने से प्रशासन उन्हे जबर्दस्ती घर से बेदखल कर रहा है। कई लोगों को पुनर्वास स्थल पर भेज दिया गया है लेकिन यहां इन्हें दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं हो रहा है। भूखे बच्चों को खाने के लिए तरसना पड़ रहा है। ऐसे में परिवारों की बडी चिंता अब इस बात की है कि उनके घर, जमीन सबकुछ डूब चुके हैं। उनका भविष्य क्या होगा। सरकारी अफसर भी उन्हें यहां लावारिस छोड गए हैं। पुनर्वास स्थलों पर कई जगह ताले डले पडे हैं। कुछ पुनर्वास स्थलों पर पीने के पानी की समस्या के कारण प्रशासन एन वक्त पर नलकूप खनन करवा रहा है।

नर्मदा घाटी के तमाम गाँवों में इन दिनों तबाही जैसे हालात बने हुए हैं। लोगों की जिंदगी भर की कमाई पानी में डूब चुकी है। घरों में कहीं दो फीट तो कहीं चार से पांच फीट तक पानी भर गया है। कहीं घरों की छतें दिखाई दे रही है तो कहीं नामो निशान ही डूब चुका है। पिछोडी गांव के रहने वाले अरविंद बडोले बताते हैं कि वे अभी भी मूल गांव में रह रहे हैं। गाँव के ही कई लोगो को पात्र माना गया है जबकि कुछ लोगों को अपात्र माना गया है। हमें अभी तक प्लाट नहीं मिला है। जिनको मिला है उन्हें पांच किलोमीटर दूर दिया गया है। गाँव के जिन लोगों को बसाया गया है उन्हे अलग-अलग जगह प्लाट दिए गए हैं।

पिछोडी के ही बलराम सोलंकी बताते हैं कि उन्हें अभी तक प्लाट नहीं दिया गया। 4 दिन पहले कलेक्टर आए थे उन्होंने कहा था कि प्लाट जल्द ही दे देंगे। अगले दिन हम एनवीडीए (नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण) के दफ्तर गए लेकिन वहां आज नहीं कल आने की बात कह रहे हैं। हमारा सब कुछ डूब गया है। कहां जाएं कुछ समझ नहीं आ रहा।

डूब प्रभाविक इलाके अंवला से अंजड के पुनर्वास स्थल आए संजय सरकारी अफसरों से नाराज है। दो वक्त का खाना तो मिल रहा है लेकिन वक्त तय नहीं है। बच्चों को भूख लगती है तो उन्हें दिलासा देकर चुप कराना पडता है। सरकारी अफसरों को आना चाहिए लेकिन उनकी सुध लेने कोई नहीं आ रहा। पुनर्वास स्थल पर पीने के पानी का इंतजाम नहीं है। आग लगी तब कुंआ खोदने की तर्ज पर अब नलकूप खोदा जा रहा है। कई पुनर्वास स्थलों पर ताले डले हैं।

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