इंदौर के नेता कब सीखेंगे अपना जन्मदिन मनाना?

भारी भरकम राशि खर्च करने के बाद भी लोग नेताओं के जन्मदिन को लेकर कतई गंभीर नहीं होते बल्कि उल्टे उन्हें विज्ञापनों से एलर्जी होती है, क्या अखबारों में विज्ञापन देने के पीछे नेताओं का यह उद्देश्य यह रहता है कि लोगों तक संदेश चला जाए आज उनका जन्मदिन है.

अर्जुन राठौर। आखिर इंदौर के नेता कब सीखेंगे अपना जन्मदिन मनाना ? क्या उनके लिए जन्मदिन मनाने के मायने सिर्फ इतने रहेंगे की अखबारों में ढेर सारे विज्ञापन छपवा दिए जाए इससे उन्हें लगेगा कि उनकी सब तरफ जय जय कार हो रही है ।

लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है भारी भरकम राशि खर्च करने के बाद भी लोग नेताओं के जन्मदिन को लेकर कतई गंभीर नहीं होते बल्कि उल्टे उन्हें विज्ञापनों से एलर्जी होती है, क्या अखबारों में विज्ञापन देने के पीछे नेताओं का यह उद्देश्य यह रहता है कि लोगों तक संदेश चला जाए आज उनका जन्मदिन है, लेकिन आम जनता को नेताओं के जन्मदिन से भला क्या लेना देना उन्हें तो अपनी रोजी-रोटी से फुर्सत नहीं है ।

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यदि नेता अपने जन्मदिन मनाने का उद्देश्य बदल ले तो जरूर लोगों तक उनके बारे में बहुत अच्छा संदेश जा सकता है मसलन जरूरमंद लोगों को इलाज की सुविधा, दवाइयों की सुविधा, रक्तदान शिविर, वृद्ध आश्रम में जाकर भोजन वितरण, अनाथ आश्रम के बच्चों को भोजन के साथ ही अनेक ऐसे कार्य किए जा सकते हैं जिनकी लोगों को बहुत अधिक जरूरत है

यदि एक नेता अपने जन्मदिन पर ऐसा करने लगेंगे तो सचमुच उनके प्रति लोगों का आदर भाव भी बढ़ेगा और जरूरतमंदों को फायदा भी मिलेगा ।