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आंचलिक भाषा हम अपनी मां के मुख से सुनते हैं: प्रसिद्ध लेखिका विभा रानी

सुभद्रा कुमारी चौहान स्मृति अखिल भारतीय महिला साहित्य समागम के तीसरे सत्र में आज मूल्यों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण विषय पर बोलते हुए प्रसिद्ध लेखिका विभा रानी ने कहा कि हम आंचलिक बोलियां अपनी मां के मुख से सुनते हैं उन्होंने कहा कि आज स्त्री अधोवस्त्र से मुक्त होने की आजादी पुरुष समाज से चाहती है।

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विभा रानी ने कहा कि क्षेत्रीय भाषा के माध्यम से भी बोलियां चलन में आती है मिथिला भाषा में तो शादी में गाली दी जाती है इससे पहले उमा कलमकार ने कहा कि बोलियों के माध्यम से विभिन्न प्रतीकात्मक शब्द बन गए हैं जिसमें बड़े मीठे शब्द चलन में आ गए हैं इससे पहले लेखिका पदमा राजेंद्र ने कहा कि मालवी में कई ऐसे शब्द जो गाली के रूप में हैं लेकिन वह बड़े मीठे लगते हैं और इनका उपयोग बड़े बूढ़े करते आए हैं।

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