कश्मीर मुद्दा: UNSC में 9 वोट भी नहीं जुटा सका पाकिस्तान

यह पहला मौका है जब संयुक्त राष्ट्र जैसी मुखिया संस्था को बंद दरवाजे के पीछे बैठक करनी पड़ रही है।

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imran khan

नई दिल्ली: कश्मीर मूदे पर पकिस्तान को अब ये समझ नही आ रहा है कि वह करे क्या। पाकिस्तान इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाने के लिए लगातार कोशिश कर रहा था लेकिन उसकी एक दलील नहीं टिकी। इस मामले पर कोई भी देश उसके साथ खड़े होने को तोयार नहीं है सिवाय चीन के। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लगभग सभी देशों ने उसे बैरंग लौटा दिया। बस एक चीन ही है जो उसकी फरियाद सुन रहा है।

शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र कश्मीर मुद्दे पर बैठक करने जा रहा है। यह पहला मौका है जब संयुक्त राष्ट्र जैसी मुखिया संस्था को बंद दरवाजे के पीछे बैठक करनी पड़ रही है। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में दूसरा मौका है जब कश्मीर मुद्दे पर कोई बैठक होने जा रही है। इससे पहले कश्मीर मुद्दे को लेकर 1971 में बैठक हुई थी।

हालांकि 1971 में कश्मीर मुद्दे को लेकर हुई बैठक कई मायनों में अलग थी। वह बैठक न तो बंद दरवाजे के पीछे थी और न ही सुरक्षा परिषद् के अधिकांश सदस्य देशों ने पाकिस्तान का समर्थन करने से मना किया था। यूएनएससी में 1969-71 में ‘सिचुएशन इन द इंडिया/पाकिस्तान सबकॉन्टिनेंट’ विषय के तहत कश्मीर का मुद्दा उठाया गया था।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (यूएनएससी) में कुल 15 सदस्य हैं। इनमें 5 स्थाई और 10 अस्थाई हैं. अस्थाई सदस्यों का कार्यकाल कुछ वर्षों के लिए होता है जबकि स्थाई सदस्य हमेशा के लिए होते हैं। स्थाई सदस्यों में अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस शामिल हैं। अस्थाई देशों में बेल्जियम, कोट डीवोएर, डोमिनिक रिपब्लिक, इक्वेटोरियल गुएनी, जर्मनी, इंडोनेशिया, कुवैत, पेरू, पोलैंड और साउथ अफ्रीका जैसे देश हैं।