उमा, सुषमा, आडवाणी और जोशी पर सख्ती, प्रियंका गांधी पर मोदी सरकार की मेहरबानी

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत से भाजपा गदगद है, लेकिन पार्टी के सामने एक नई मुसीबत खड़ी हो गई। मोदी सरकार नवनिर्वाचित सांसदों के आवासों को लेकर काफी चिंतित है। ऐसे में सरकार को पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, सुषमा स्वराज, उमा भारती, कलराज मिश्र, शांता कुमार और मेजर बीसी खंडूरी से सरकारी बंगला खाली करना पड़ सकता है। हालांकि ये नेता दोनों ही सदनों के सदस्य नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभ चुनाव के बाद ऐसे सांसदों को एक माह में आवास खाली करने थे, जो लोकसभा चुनाव हार चुके हैं या चुनाव लड़े ही नही हैं। हालांकि चुनाव हार चुके कई सांसद पहले ही आवास खाली कर चुके हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खाली किया आवास

बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया बंगला खाली कर पांच सितारा होटल में शिफ्ट हो गए हैं। वहीं नेताजी सुभाष चंद्र बोस के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस नेता प्रोफेसर सुगतो बोस भी सांसद नहीं रहने पर सरकारी घर छोड़ चुके हैं।

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इधर, बताया जा रहा है कि लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने सांसदों को मकान का आवंटन लोकसभा और राज्यसभा की आवास समितियां गठित करने की बात कही है। मंत्रियों को बंगला केंद्र सरकार के पूल से मिलता है और उसका फैसला केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाली आवास मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीए) करती है।

प्रियंका को मिल सकता है सरकारी बंगला

बताया जा रहा है कि यदि किसी नेता की सुरक्षा को खतरा है तो प्रियंका गांधी की तरह उन्हें किसी सदन का सदस्य न होते हुए भी सरकारी बंगला आवंटित किया जा सकता है।

जहां आडवाणी को एनएसजी के सुरक्षा गार्डों वाली जेट प्लस सुरक्षा मिली है, जोशी को आईटीबीपी के जवानों की सुरक्षा मिली है। संभवतः सुरक्षा कारणों की वजह से ही बसपा प्रमुख मायावती को भी अभी बंगला खाली करने के निर्देश नहीं हुए हैं, जबकि वे राज्यसभा से सवा साल पहले ही इस्तीफा दे चुकी हैं।

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