सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी का पहला दीक्षांत समारोह गरिमामय रूप से हुआ संपन्न

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इंदौर। देश की पहली स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी, सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी आॅफ एप्लाइड साइंसेस ;एसयूएएसद्ध का पहला दीक्षांत समारोह गरिमापूर्ण कार्यक्रम के रूप में संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश के राज्यपाल माननीय लालजी टंडन की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में मप्र शासन के उच्चशिक्षा मंत्री जीतू पटवारी विशेष अतिथि थे। यूनिवर्सिटी के फाउंडर पद्मभूषण डॉ. एस.बी. मुजुमदार, प्रो चांसलर डाॅ. स्वाति मुजुमदार, और वाइस चांसलर डॉ. संजय कुमार सहित यूनिवर्सिटी के अन्य लोग भी इस दौरान मौजूद थे।

डॉ. एस.बी. मुजुमदार ने अपने उद्बोधन में छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए कहा- देश की पहली स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, आज यहां से डिग्री हासिल कर रहे छात्र उसके पहले पन्ने पर स्थान हासिल करेंगे। आज आपकी शिक्षा भलें पूरी हो गई हो लेकिन सीखने की शुरुआत अब होगी। आगे चलकर आप समाज का सामना करेंगे। अच्छे और बुरे अनुभव आपको होंगे। ये अनुभव किसी भी प्रोफेसर से ज्यादा शिक्षा देंगे। आज की विडंबना ये है कि हमारे पास बड़े घर हैं लेकिन परिवार छोटे, डिग्रियां ज्यादा हैं लेकिन संवेदनाएं कम, नॉलेज ज्यादा है लेकिन जजमेंट कम, एक्सपर्ट्स ज्यादा हैं लेकिन समस्याएं भी बढ़ गई हैं दवाईयों की भरमार है लेकिन हेल्थ नहीं हैं। फास्ट फूड है लेकिन पाचन धीमा हो चुका है। आप आगे किसी भी क्षेत्र में अपना करियर बनाएं लेकिन ध्यान रखें, खुशी और शांति के साथ मिली सफलता ही असल सफलता होती है। जीवन में हार्डवर्क, इनोवेशन, पैशन और कम्पेशन के दम पर कुछ भी हासिल किया जा सकता है। कभी भी उम्मीद ना छोड़ें और किसी भी चीज़ के लिए ना नहीं कहें।

अध्यक्षीय उद्बोधन में राज्यपाल माननीय लालजी टंडन ने कहा- पुराने समय में देश में शिक्षा के तीन केंद्र थे। तक्षशिला विश्वद्यिालय जहां था वो जगह आज पाकिस्तान में है। नालंदा विश्वविद्यालय बिहारी में था। तीसरी जगह अवंति थी जिसके अंश के रूप में आज इंदौर को पहचाना जाता है। आज यदि हम नए भारत के निर्माण की बात करते हैं तो हमें अपने इतिहास को याद रखना होगा। गुलामी वाले इतिहास को नहीं बल्कि नालंदा और तक्षशिला वाले उस इतिहास को जिसके दम पर दुनिया हमें विश्व गुरू मानती थी। समय के साथ हमारी संपदाओं को लुटा गया और साहित्य को जलाया गया लेकिन श्रुति और स्मृति के आधार पर हमारे विद्यानों ने उन्हें पुनः बार-बार लिखा। आज हमें पुरानी नींव पर नए भारत की इमारत खड़ी करना होगी। इसके लिए सिम्बायोसिसि जैसी यूनिवर्सिटी का योगदान भी महत्वपूर्ण है। हमें ऐसे शिक्षण संस्थान बनाने होंगे जहां दूसरे देशों से छात्र पढ़ने आएं। जब वे लौटकर वापस जाएं तो भारत का गुणगाान करें। यही हमारे पुनः विश्व गुरू बनने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

मप्र शासन के मंत्री जीतू पटवारी ने कहा- हमे ऐसी शिक्षा व्यवस्था पर जोर देना होगा जो विद्यार्थियों को एक संपूर्ण व्यक्ति बनाए। उन्हें शिक्षा के साथ संस्कार दे, देशभक्ति सिखाए और पर्यावरण के प्रति उन्हें जिम्मेदारी की एहसास करवाए। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को हम उसी ओर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन ये अकेले सरकार के दम पर नहीं हो सकता इसमें निजी विश्वविद्यालयों की भागिदारी भी जरूरी है। सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी देश का पहला ऐसा संस्थान है जो युवाओं को उद्योगों की जरूरत के मुताबिक शिक्षा दे रहा है और कुशल बना रहा है। हमें ऐसे ही शिक्षण संस्थानों की जरूरत है।

समारोह की शुरुआत में डॉ. स्वाति मुजुमदार ने कहा- आज का दिन यूनिवर्सिटी से संबंधित सभी लोगों के लिए यादगार है। 2016 में शुरु हुई इस यूनिवर्सिटी की पहली बैच के छात्र-छात्राएं आज अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। यूनिवर्सिटी को आम संस्थानों से अलग बनाने के लिए हमने रेग्यूलर की जगह विशेष कोर्स यहां शुरू किए क्योंकि हमारा मकसद छात्रों को उद्योगों की मांग के अनुरूप तैयार करना था।

वाइस चांसलर डॉ. संजय कुमार ने यूनिवर्सिटी की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि यहां छात्रों को 70 फीसदी व्यवहारिक ज्ञान दिया जाता है। इसके लिए कैंपस में ही माँक बैंक और रिटले स्टोर स्थापित किए गए हैं। 30 से ज्यादा प्रयोगशालाओं में अत्याधुनिक उपकरण लगे हैं। हर 20 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक उपलब्ध है। इसके अलावा उन्होंने अन्य शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी भी दी।

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल महोदय ने मेधावी छात्र-छात्राओं को गोल्ड मैडल भी प्रदान किए। राष्ट्रगान के साथ गरिमामय समारोह का समापन हुआ।

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