श्रीलंका : दिनेश गुणवर्धने बने देश के नए प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के रह चुके हैं सहपाठी

-ताजा जानकारी के अनुसार दिनेश गुणवर्धने श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए हैं। नवनियुक्त राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के द्वारा श्रीलंका के पूर्व लोक प्रशासन मंत्री दिनेश गुणवर्धने को प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त किया गया है। प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने, राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के रह चुके हैं सहपाठी। आक्रोशित प्रदर्शनकारी जनता द्वारा विरोध प्रदर्शन रोकने की घोषणा।

ताजा जानकारी के अनुसार दिनेश गुणवर्धने (Dinesh Gunawardene) श्रीलंका (Sri Lanka) के नए प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए हैं। नवनियुक्त राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के द्वारा श्रीलंका के पूर्व लोक प्रशासन मंत्री दिनेश गुणवर्धने को प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त किया गया है। इससे पहले श्रीलंका के प्रधानमंत्री पद पर वर्तमान में राष्ट्रपति पद पर आसीन रानिल विक्रमसिंघे बने हुए थे। देश में बीते कई दिनों से जारी आर्थिक संकट के चलते पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के द्वारा श्रीलंका से पलायन कर लिया गया था, जिसके बाद उन्होंने मालदीव के बाद सिंगापूर पहुंच कर श्रीलंका के राष्ट्रपति पद से अपना इस्तीफा दे दिया था।

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प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने, राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के रह चुके हैं सहपाठी

जानकारी के अनुसार श्रीलंका के नवनियुक्त प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने देश के वर्तमान राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के विद्यालयीन सहपाठी रह चुके हैं। इसके साथ ही अपने अबतक के राजनैतिक सफर में दिनेश गुणवर्धने श्रीलंका के प्रधानमंत्री से पहले देश के पूर्व लोक प्रशासन मंत्री रह चुके हैं। दिनेश गुणवर्धने राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के कार्यकाल के दौरान गृह मंत्री भी रह चुके हैं। इसके साथ ही विदेश मंत्री और शिक्षा मंत्री के महत्वपूर्ण पदों पर भी दिनेश गुणवर्धने आसीन रह चुके हैं।

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आक्रोशित प्रदर्शनकारी जनता द्वारा विरोध प्रदर्शन रोकने की घोषणा

श्रीलंका में बीते लम्बे समय से जारी आर्थिक संकट के चलते देश की जनता द्वारा देश भर में आक्रोश पूर्ण विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था। इस आक्रोश भरे विरोध प्रदर्शन से डरकर देश के तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के द्वारा श्रीलंका से पलायन करके सिंगापूर से अपना इस्तीफा राष्ट्रपति पद से दे दिया गया था। आक्रोशित जनता के द्वारा तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और तत्कालीन प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे दोनों का विरोध किया जा रहा था और साथ ही दोनों से अपने-अपने पदों से इस्तीफे की मांग की जा रही थी। अब जानकारी के अनुसार आक्रोशित प्रदर्शनकारी जनता द्वारा विरोध प्रदर्शन रोकने की घोषणा की जा रही है।