भारतवर्ष : आज ही के दिन बना था ‘तिरंगा’ राष्ट्रध्वज, 22 जुलाई 1947 को अपनाया गया था पहली बार

-भारत देश का प्रतीक हमारा राष्ट्रिय ध्वज तिरंगा आज ही के दिन आधिकारिक रूप से देश के राष्ट्रध्वज के रूप में अपनाया गया था। केसरिया, सफेद और हरे रंग को समाहित किए हुए राष्ट्रध्वज तिरंगा हमारे देश की वृहद संस्कृति का परिचायक है। 22 जुलाई को कहा जाता है राष्ट्रिय झंडा अंगीकरण दिवस।

भारत (India) देश का प्रतीक हमारा राष्ट्रिय ध्वज तिरंगा आज ही के दिन 22 जुलाई वर्ष 1947 को आधिकारिक रूप से देश के राष्ट्रध्वज (National flag) के रूप में अपनाया गया था। केसरिया, सफेद और हरे रंग को समाहित किए हुए राष्ट्रध्वज तिरंगा हमारे देश की वृहद संस्कृति का परिचायक है। सबसे ऊपर केसरिया रंग, बीच में सफेद और सबसे नीचे हरा रंग समान अनुपात में तिरंगे में सम्मिलित हैं। बीच में स्थित सफेद रंग की पट्टी पर नीले रंग से एक चक्र अंकित किया हुआ होता है, जोकि सारनाथ स्थित अशोक चक्र से लिया गया है।

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22 जुलाई को कहा जाता है राष्ट्रिय झंडा अंगीकरण दिवस

22 जुलाई को भारत में राष्ट्रिय झंडा अंगीकरण दिवस के रूप में मनाया जाता है । तिरंगे के निर्माण की एक लम्बी यात्रा स्वामी विवेकानंद की शिष्या सिस्टर निवेदिता से प्रारम्भ होती है, जिन्होंने सर्वप्रथम वर्ष 1904 में दो रंगों का एक ध्वज निर्माण किया, जिसमें लाल और पीले रंग का समावेश था। इस ध्वज को सिस्टर निवेदिता ध्वज के नाम से जाना जाता है। तीन रंगों का ध्वज सबसे पहले बंगाल के शचीन्द्र कुमार बोस लेकर के आए। इस ध्वज में क्रमशः केसरिया, पीला और हरे रंग का उपयोग किया गया था। केसरिया हिस्से पर सफेद रंग आठ कमल की कलियाँ अंकित थी और नीचे हरे रंग के हिस्से में सूरज और चन्द्रमा अंकित किए गए थे। बीच के पीले रंग के भाग पर हिंदी में वन्दे मातरम लिखा हुआ था। वर्ष 1916 में पिंगली वेंकैया द्वारा एस.बी. बोमान जी और उमर सोमानी जी के साथ मिलकर ‘नेशनल फ़्लैग मिशन’ का गठन किया। जिसमें गांधी जी के परामर्श से तिरंगे का मौलिक वर्तमान स्वरूप अस्तित्व में आया।

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